जगदलपुर। झीरम घाटी हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने न्याय के लिए आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि कांग्रेस और झीरम पीड़ित परिवार अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर अब आगे की लड़ाई चरणबद्ध तरीके से लड़ी जाएगी।
एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जगदलपुर स्थित विशेष अदालत ने सितंबर 2026 में झीरम घाटी हमले से जुड़े 10 सीपीआई (माओवादी) कैडरों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। एनआईए ने इस फैसले की जानकारी अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में दी है।
राहुल गांधी के साथ हुई पीड़ित परिवारों की बैठक
दीपक बैज के मुताबिक, 26 सितंबर को दिल्ली में राहुल गांधी के साथ झीरम पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई। बैठक में पीड़ित परिवारों ने अपनी बात रखी और मामले में आगे की कानूनी, न्यायिक तथा राजनीतिक लड़ाई को लेकर चर्चा की गई।
बैज के अनुसार, बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि झीरम मामले में न्याय की मांग को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रखा जाएगा। 26 सितंबर की इस बैठक की रिपोर्ट अन्य मीडिया संस्थानों ने भी की है।
NIA कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने जताई असहमति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद भी मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशना बाकी हैं।
बैज ने दावा किया कि कांग्रेस और पीड़ित परिवार उन लोगों तक भी जांच और कार्रवाई पहुंचाने की मांग कर रहे हैं, जिन्हें वे हमले की व्यापक साजिश से जुड़ा मानते हैं।
यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है; इन आरोपों और दावों को पार्टी के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बड़े माओवादी नेताओं और कथित साजिश को लेकर सवाल
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि झीरम हमले की कथित साजिश में शामिल बड़े कैडर और प्रमुख माओवादी नेता अब तक कानून के दायरे में नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि जांच और कानूनी कार्रवाई उन लोगों तक भी पहुंचे, जिन्हें पार्टी हमले की साजिश से संबंधित मानती है।
मीडिया रिपोर्टों में भी मामले में दोषसिद्धि और मृत्युदंड के अलावा कुछ आरोपियों के फरार होने तथा कुछ माओवादी नेताओं के बाद में आत्मसमर्पण करने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
19 सितंबर को रायपुर में हुई थी बैठक
बैज ने बताया कि इससे पहले 19 सितंबर को रायपुर स्थित कांग्रेस भवन में झीरम घटना में मारे गए लोगों के परिवारों, पीड़ित परिवारों और घायलों के परिजनों की बैठक हुई थी।
इस बैठक में मामले में आगे की न्यायिक लड़ाई और पीड़ित परिवारों की मांगों पर चर्चा की गई थी। इसके बाद 26 सितंबर को दिल्ली में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे को आगे के स्तर पर उठाया गया।
अब चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, पार्टी अब झीरम मामले में सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के साथ राजनीतिक स्तर पर भी अपनी मांग उठाएगी।
बैज ने संकेत दिया है कि दिल्ली में हुई चर्चा और पार्टी नेतृत्व से मिले मार्गदर्शन के बाद कांग्रेस चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। पार्टी का कहना है कि झीरम पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उसका संघर्ष जारी रहेगा।
मृत्युदंड पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया बाकी
एनआईए विशेष अदालत की ओर से सुनाई गई मृत्युदंड की सजा अंतिम न्यायिक परिणाम नहीं है। मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और उच्च न्यायालय स्तर पर पुष्टि/अपील का प्रावधान लागू होता है।
इसलिए वर्तमान स्थिति में जगदलपुर की विशेष अदालत का फैसला मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक चरण है, जबकि आगे की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रह सकती है। एनआईए ने अपनी आधिकारिक जानकारी में जगदलपुर विशेष अदालत के फैसले में 10 आरोपियों को मृत्युदंड दिए जाने की पुष्टि की है।









