बेमेतरा (छत्तीसगढ़): बेमेतरा जिला कलेक्ट्रेट परिसर बुधवार को उस समय अखाड़ा बन गया जब एक कांग्रेस नेता ने सार्वजनिक रूप से आत्मदाह करने का प्रयास किया। कलेक्टर के सामने ही खुद पर पेट्रोल डालकर जान देने की इस कोशिश से प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि, मौके पर तैनात जवानों की तत्परता से एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस घटना ने जिले के सियासी पारे को बढ़ा दिया है।
क्यों उठाया यह आत्मघाती कदम?
आत्महत्या की कोशिश करने वाले कांग्रेस नेता ने कृषि विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। नेता का कहना है कि उन्होंने कृषि विभाग के कार्यालय भवन का निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा किया था। निर्माण कार्य पूर्ण हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन विभाग ने अब तक भुगतान (Payment) नहीं किया है। बकाया राशि न मिलने के कारण वह पिछले एक साल से आर्थिक तंगी और भारी मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं।
कलेक्टर के सामने ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कांग्रेस नेता पूरी तैयारी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर की मौजूदगी में ही अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया। इससे पहले कि वह माचिस जला पाते, वहां तैनात सुरक्षा जवानों ने फुर्ती दिखाते हुए उन्हें दबोच लिया और उनके हाथ से माचिस छीन ली।
थाने में भारी भीड़, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
घटना के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बेमेतरा सिटी कोतवाली पहुंच गए। कार्यकर्ताओं का आक्रोश चरम पर है और उनकी मांगें स्पष्ट हैं. कृषि विभाग के उन अधिकारियों पर कार्रवाई हो जिन्होंने भुगतान रोका है। संबंधित अधिकारियों को तत्काल पुलिस स्टेशन बुलाकर उनसे पूछताछ की जाए। अधिकारी के काम करने के तरीके को ‘तानाशाही’ बताते हुए कांग्रेसियों ने कहा है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कलेक्ट्रेट और सिटी कोतवाली इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांग्रेस नेता की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया और अधिकारियों के रवैये पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।









