रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की गई है। महासमुंद के बाद अब नारायणपुर जिले के एक सरकारी कॉलेज में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए करोड़ों रुपये की अवैध खरीदी का मामला सामने आया है। इस मामले में विभाग ने प्राचार्य सहित पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
नारायणपुर में नियमों की उड़ी धज्जियां
नारायणपुर स्थित नवीन वीरांगना रमोतिन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में पीएम-उषा मद से मिली राशि का उपयोग करने में भारी लापरवाही बरती गई। जांच में पाया गया कि बिना किसी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के ही करोड़ों रुपये की खरीदी कर ली गई।
निलंबित होने वाले अधिकारी:
- डॉ. योगेन्द्र कुमार पटेल (प्राचार्य)
- भूषण जय गोयल (सहायक प्राध्यापक)
- किशोर कुमार कोठारी (सहायक प्राध्यापक)
- हरीश चंद बैद (सहायक प्राध्यापक)
- नोहर राम (सहायक प्राध्यापक)
इन सभी के विरुद्ध अब पृथक से विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। निलंबन अवधि के दौरान इनका मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, रायपुर नियत किया गया है।
महासमुंद में भी हुई थी ऐसी ही कार्रवाई
इससे पहले महासमुंद के शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट में भी करीब 1.06 करोड़ रुपये की खरीदी में गड़बड़ी पाई गई थी। वहां के प्राचार्य डॉ. एसएस तिवारी और क्रय समिति के सदस्य डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. बृहस्पत सिंह विशाल, पीठी सिंह ठाकुर और डॉ. एसएस दीवान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
मंत्री टंकराम वर्मा का ‘क्लीन स्वीप’ अभियान
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के निर्देश पर विभाग लगातार भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कस रहा है। विभाग की इस कार्रवाई से शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में भी जांच चल रही है और वहां भी जल्द ही बड़ी कार्रवाई की संभावना है।









