नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय यात्रा की स्वतंत्रता को लेकर जारी होने वाली साल 2026 की सबसे प्रतिष्ठित रिपोर्ट ‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स’ (Henley Passport Index) में भारत के लिए अच्छी खबर आई है। भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है और अब भारत 80वें स्थान पर काबिज हो गया है। इस रैंकिंग में सुधार का सीधा मतलब है कि अब भारतीयों के लिए विदेश यात्रा के रास्ते और भी आसान हो गए हैं।
भारतीय पासपोर्ट: 80वीं रैंक और 55 देशों का एक्सेस
पिछले साल यानी 2025 में भारत 85वें स्थान पर था। इस साल 5 पायदान चढ़कर भारत ने अल्जीरिया और नाइजर के साथ 80वीं रैंक साझा की है।भारतीय नागरिक अब दुनिया के 55 देशों में बिना पूर्व वीजा (वीजा-फ्री), वीजा ऑन अराइवल या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) के जरिए प्रवेश कर सकते हैं। थाईलैंड, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और फिजी जैसे देशों में अब भारतीय यात्रियों को प्राथमिकता मिलेगी।
दुनिया के टॉप 5 सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट (2026)
| रैंक | देश | वीजा-मुक्त पहुंच (देशों की संख्या) |
| 1 | सिंगापुर | 192 |
| 2 | जापान, दक्षिण कोरिया | 188 |
| 3 | डेनमार्क, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड | 186 |
| 4 | ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे | 185 |
| 5 | यूएई (UAE), हंगरी, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया | 184 |
UAE और अमेरिका की स्थिति
इस साल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है और 5वें स्थान पर पहुँच गया है। वहीं, अमेरिका का पासपोर्ट इस बार 10वें स्थान पर रहा। एशियाई देशों (सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया) का दबदबा शीर्ष 3 में लगातार बना हुआ है।
क्यों बढ़ी भारत की रैंकिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के कारण कई देशों ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील दी है। थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों द्वारा हाल ही में दी गई अस्थायी वीजा छूट ने भी भारत की स्थिति को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है।
सबसे कमजोर पासपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान (101वां स्थान) दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट बना हुआ है, जहां के नागरिक केवल 24 देशों में ही वीजा-मुक्त यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद सीरिया, इराक और पाकिस्तान का नंबर आता है।









