नारायणपुर। छत्तीसगढ़ का वह इलाका जिसे कभी ‘अबूझ’ पहेली और नक्सलियों का सुरक्षित किला माना जाता था, आज राज्य के मुखिया की सादगी और बदलते सुरक्षा परिदृश्य का गवाह बना। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार को एक आम यात्री की तरह सरकारी बस में सवार होकर नारायणपुर के सुदूर गांव कुरूषनार पहुंचे। यह केवल एक सरकारी दौरा नहीं था, बल्कि बस्तर के उस भरोसे की वापसी थी जो दशकों से नक्सलवाद के साये में डरा-सहमा था।
खौफ के रास्तों पर अब भरोसे का सफर
अबूझमाड़ की ये वही सड़कें हैं, जहां कभी सुरक्षा बलों की बख्तरबंद गाड़ियों की आवाजाही पर भी घात लगाकर हमले का डर बना रहता था। आज उन्हीं रास्तों पर सार्वजनिक परिवहन की बसें दौड़ रही हैं। मुख्यमंत्री का बस में बैठकर आम जनता के बीच पहुंचना यह स्पष्ट संदेश देता है कि क्षेत्र में सुरक्षा के हालात अब पूरी तरह बदल चुके हैं और नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने किया योजनाओं का क्रियान्वयन
कुरूषनार पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्कूल का दौरा किया और बच्चों से आत्मीय बातचीत कर उनकी पढ़ाई के बारे में जाना। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दुकान का निरीक्षण कर गरीबों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता परखी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिलाओं को महतारी वंदन योजना की राशि का वितरण भी किया, जिससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल दिखा।
विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम
नारायणपुर के सुदूर सीमांत गांवों को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री बस सेवा की शुरुआत अबूझमाड़ के लोगों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह दृश्य असाधारण था कि राज्य का सर्वोच्च प्रतिनिधि बिना किसी तामझाम के, उन्हीं की बस में बैठकर उनके द्वार तक पहुंचा। यह कदम प्रशासन और जनता के बीच सालों से टूटे भरोसे को जोड़ने की एक मजबूत कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।









