सूरजपुर: जिले की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरजपुर संगठन में मचे घमासान ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। एक साथ 17 से अधिक पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिख रहा है।
30 के पार पहुंची इस्तीफों की चर्चा
जानकारी के अनुसार संयुक्त महामंत्री, महामंत्री और सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत कई पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस्तीफों की संख्या 30 के पार पहुंच चुकी है। पूर्व मंत्री खेल साय सिंह के परिवार से जुड़ा नाम सामने आना इस घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला रहा है।
गुटबाजी की चर्चा तेज
सूत्रों के मुताबिक, संगठनात्मक नियुक्तियों में एक गुट को प्राथमिकता दिए जाने और दूसरे गुट की अनदेखी से असंतोष बढ़ा। जिले की राजनीति में लंबे समय से टी.एस. सिंहदेव और भूपेश बघेल समर्थक गुटों के बीच खींचतान की चर्चा होती रही है।
हालांकि इस्तीफा देने वाले अधिकांश पदाधिकारी खुलकर कारण बताने से बच रहे हैं। एक महिला पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें पद की जिम्मेदारी देने से पहले राय नहीं ली गई थी और उन्होंने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ी है।
जिला संगठन का सावधानी भरा रुख
जिला कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी ने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं सौंपा है। उनका दावा है कि जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है और आधिकारिक पत्र मिलने पर ही निर्णय लिया जाएगा।
भाजपा ने ली चुटकी
उधर भारतीय जनता पार्टी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी नई बात नहीं है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि नेतृत्व संघर्ष का असर पहले भी विकास पर पड़ा था और अब भी आपसी खींचतान जारी है।
फिलहाल सूरजपुर की राजनीति में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और संगठनात्मक कदमों पर सबकी नजर रहेगी।









