रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के आरोपी दिनेश चंद्राकर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। एनडीटीवी एमपी-सीजी के पत्रकार और ‘बस्तर जंक्शन’ यूट्यूब चैनल संचालक मुकेश चंद्राकर की हत्या के इस सनसनीखेज मामले में अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता, प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्य को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी की जाए। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुशील दुबे ने दलील दी कि दिनेश चंद्राकर को झूठे आरोप में फंसाया गया है और पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आरोपी 4 जनवरी 2025 से जेल में बंद है और ट्रायल में समय लग सकता है, इसलिए उसे जमानत दी जाए।
वहीं, राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता अजीत सिंह और पीड़ित पक्ष के वकील प्रीतम सिंह राजपूत ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में मिले साक्ष्य सीधे तौर पर आरोपी के खिलाफ हैं और उसे राहत देने से मामले की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी 2025 की रात से लापता थे। अगले दिन 2 जनवरी को उनके भाई युकेश चंद्राकर ने बीजापुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और रितेश चंद्राकर को मुकेश की कुछ ख़बरों से आपत्ति थी। इन्हीं तीनों पर हत्या का संदेह जताया गया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 1 जनवरी की रात रितेश चंद्राकर ने पार्टी का बहाना बनाकर मुकेश को चट्टानपारा स्थित गोदाम-बाड़ा बुलाया। वहां उसने अपने साथी महेंद्र रामटेके के साथ मिलकर मुकेश की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को वहीं के सेप्टिक टैंक में डालकर सीमेंट से पाट दिया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें। बाद में दिनेश चंद्राकर, जो उस समय परिवार के साथ चित्रकोट में पिकनिक पर था, घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचा और शव छिपाने में मदद की।










