Trendingआस्थाबड़ी खबर

क्यों खास हैं शक्तिपीठ और कैसे अलग हैं सिद्धपीठ? जानें सबकुछ

Difference Between Shaktipeeth and Siddhapeeth: आज नवरात्रि का छठा दिन है और भक्त मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की उपासना की जाती हैं. देवी शक्ति की उपासना के इन नौ दिनों में हम अक्सर शक्तिपीठ और सिद्धपीठ जैसे शब्दों को सुनते हैं. भारत की इस पावन धरती पर देवी के अनेक मंदिर हैं, जिनमें से कुछ शक्तिपीठ हैं तो कुछ सिद्धपीठ. अक्सर श्रद्धालु इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इनके पीछे की कथाएं और महत्व अलग-अलग हैं. आइए जानते हैं क्या है इनका रहस्य.

क्या होते हैं शक्तिपीठ?
शक्तिपीठों का संबंध भगवान शिव और माता सती से है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया और भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए. शोक में डूबे महादेव जब सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए. माता सती के शरीर के अंग, आभूषण या वस्त्र जिस-जिस स्थान पर गिरे, वहीं स्थान आज के समय में शक्तिपीठ कहलाते हैं.

शक्तिपीठ की खासियत
मान्यता के अनुसार, ये स्थान देवी शक्ति के मूल और दिव्य स्रोत माने जाते हैं यहां देवी की उपस्थिति स्वयंभू खुद प्रकट मानी जाती है. भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान में कुल मिलाकर 52 शक्तिपीठ माने जाते हैं. जिनका अपना अलग- अलग महत्व है. हर शक्तिपीठ पर देवी के साथ भगवान शिव भैरव के रूप में विराजमान होते हैं.

क्या होते हैं सिद्धपीठ?
सिद्धपीठ वे स्थान हैं जिनका संबंध शरीर के अंगों के गिरने से नहीं, बल्कि साधना और सिद्धि से है. ऐसे स्थान जहां प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों, देवताओं या स्वयं माता ने कठिन तपस्या की और सिद्धि प्राप्त की, उन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है.माना जाता है कि इन स्थानों पर दिव्य ऊर्जा का वास होता है और यहां की गई पूजा का फल बहुत जल्दी मिलता है. विंध्याचल की पहाड़ियों पर स्थित विंध्यवासिनी देवी या हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर सिद्धपीठों की श्रेणी में आते हैं. नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति की उपासना अपने चरम पर होती है. इसलिए भक्तगण सिद्धपीठों में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.

Related Posts

1 of 228