रायपुर। उत्तराखंड के चारधाम की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में करीब 1000 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित धार्मिक कॉरिडोर ‘आस्था पथ’ के जरिए पांच प्रमुख शक्तिपीठों को एक सर्किट से जोड़ने की योजना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि, पूरे कॉरिडोर के निर्माण की लागत और काम शुरू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
रतनपुर से दंतेवाड़ा तक जुड़ेंगे 5 प्रमुख शक्तिपीठ
प्रस्तावित आस्था पथ में छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख देवी मंदिरों को शामिल किया गया है। इनमें बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर, सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ धाम स्थित मां बागेश्वरी मंदिर और सक्ती जिले के चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर शामिल हैं।
इन धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाला संभावित मार्ग करीब 1000 किलोमीटर लंबा होगा। प्रस्तावित रूट मैप तैयार किया जा चुका है। अब इसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। DPR और जरूरी सरकारी मंजूरियों के बाद ही कॉरिडोर के निर्माण, बजट और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
मां महामाया मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ की योजना
धार्मिक स्थलों के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASAD) योजना का भी सहारा लिया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।
रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजी गई है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्यों के लिए एजेंसी निर्धारित कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल, योजना को मंजूरी मिलने और निर्माण शुरू होने की तारीख घोषित नहीं हुई है।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
प्रस्तावित धार्मिक कॉरिडोर के तहत मंदिरों के विकास के साथ श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। योजना में बेहतर सड़क संपर्क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा पार्किंग, सामुदायिक शौचालय, विश्राम स्थल, बैठने की व्यवस्था और हवन-पूजन स्थलों को भी बेहतर बनाने की योजना है। प्रमुख धार्मिक स्थलों पर CCTV कैमरे, पर्यटक सहायता केंद्र, गार्डन और होम स्टे जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।
स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
आस्था पथ परियोजना से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, परिवहन सेवाओं और अन्य कारोबारों को फायदा मिल सकता है। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।
परियोजना में स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश को संरक्षित रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
फिलहाल DPR और मंजूरी का इंतजार
डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा के मंदिरों के विकास के लिए भी अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, पूरे 1000 किलोमीटर के कॉरिडोर का अंतिम रूट, कुल लागत और निर्माण की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ का प्रस्तावित आस्था पथ धार्मिक पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है, लेकिन इसके धरातल पर उतरने की तस्वीर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और सरकारी स्वीकृतियों के बाद ही साफ होगी।
आस्था पथ में शामिल 5 प्रमुख मंदिर:
- मां महामाया मंदिर — रतनपुर
- मां बम्लेश्वरी मंदिर — डोंगरगढ़
- मां दंतेश्वरी मंदिर — दंतेवाड़ा
- मां बागेश्वरी मंदिर — कुदरगढ़
- मां चंद्रहासिनी मंदिर — चंद्रपुर










