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युवा शक्ति से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 36 युवा फेलो से किया संवाद

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों तथा जनसेवा के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे अपने ज्ञान, कौशल और नए विचारों का उपयोग जनकल्याण और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा फेलो को सलाह दी कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ करें तथा जनकल्याण को अपने कार्य का प्रमुख उद्देश्य बनाएं।

युवाओं को मिलेगा शासन का जमीनी अनुभव
मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच में इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से 36 युवाओं का चयन किया गया है। दो वर्षीय कार्यक्रम में पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है।

कार्यक्रम के शुरुआती तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद युवा फेलो जिला प्रशासन के साथ काम करते हुए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझेंगे। उनसे आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव देने की अपेक्षा की गई है।

शिक्षा और कौशल विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विकास की आधारशिला है। उन्होंने अपने छात्र जीवन की कठिनाइयों को याद करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले शैक्षणिक सुविधाएं सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। उस समय स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाइवलीहुड कॉलेजों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिले और वे नौकरी तलाशने के साथ रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनें।

700 से अधिक रोजगार मेलों में 24 हजार युवाओं को अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दे रही है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, वनोपज और औद्योगिक संभावनाएं निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना से भी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

एआई मिशन से छह लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एआई मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग 1,500 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को तकनीकी बदलाव का केवल हिस्सा नहीं, बल्कि उसका नेतृत्व करने के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

संघर्ष से जनसेवा तक का सफर साझा किया
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ी। उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के कई काम किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही मेहनत, जिम्मेदारी और कठिनाइयों का सामना करना सिखाया। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे गांव के सरपंच बनेंगे, लेकिन निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला।

उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के बीच रहना, उनके सुख-दुख में सहभागी बनना और समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहना ही सार्वजनिक जीवन का मूल आधार है।

युवाओं से अपने सपनों के छत्तीसगढ़ पर विचार साझा करने की अपील
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रतिभागियों को राज्य के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ पढ़ने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार लिखने के लिए प्रेरित किया।

संवाद में रायपुर की नीलिमा भारद्वाज ने फेलोशिप के प्रतिभागियों से मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने अवसर के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिलों में काम करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का अवसर मिलेगा। जशपुर के अंशुल ने अपनी शैक्षणिक यात्रा और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य साझा किए तथा प्रदेश से बाहर पढ़ रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग प्रदेश की प्रगति तथा जनसेवा के लिए करने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप का संचालन सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है। द्वितीय बैच के लिए कैट स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन हुआ है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के प्रतिभागी शामिल हैं।

प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान और मैदानी कार्य से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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