राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा में 450 करोड़ रुपये की लागत से बन रही एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर किसानों का विरोध बुधवार को उग्र रूप ले गया। पिछले 15 महीनों से फैक्ट्री के निर्माण का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने बुधवार को जमकर हंगामा किया, आगजनी की और पुलिस से भिड़ंत हो गई। हालात बिगड़ने के बाद गुरुवार को भी क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और इलाका पूरी तरह छावनी में बदल गया है। प्रशासन ने एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं।
किसानों और पुलिस में हिंसक झड़प
बुधवार दोपहर टिब्बी एसडीएम कार्यालय के बाहर बड़ी सभा के बाद हजारों किसान ट्रैक्टरों के साथ निर्माणाधीन साइट पर पहुंचे और फैक्ट्री की चहारदीवारी गिरा दी। इसी दौरान पुलिस से तीखी झड़प हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक हो गई। भीड़ ने करीब 18 वाहनों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी।
स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। झड़प में 50 से अधिक किसान घायल हो गए, जबकि संगरिया से कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया भी चोटिल बताए जा रहे हैं। हनुमानगढ़ के एसपी हरीशंकर ने बताया कि हिंसा में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की चिंता: प्रदूषण और भूजल स्तर
किसानों का कहना है कि चंडीगढ़ स्थित ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लगाया जा रहा 40 मेगावाट क्षमता वाला यह प्लांट आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ाएगा, भूजल स्तर को प्रभावित करेगा और खेती को नुकसान पहुंचाएगा।
राजनीति में तेज़ी
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी है कि जब तक फैक्ट्री बंद नहीं की जाती, आंदोलन जारी रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने X पर लिखा कि किसान आंदोलन के दौरान पुलिस का बल प्रयोग निंदनीय है और विधायक अभिमन्यु पूनिया के घायल होने की खबर चिंताजनक है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
प्रशासन शांति बहाली के प्रयासों में जुटा है और हालात पर कड़ी नजर रख रहा है। इससे पहले 18 नवंबर को भी किसानों को हटाने के लिए कार्रवाई की गई थी और धारा 163 लगाकर फैक्ट्री निर्माण का काम पुनः शुरू कराया गया था।









