बिलासपुर। बहुचर्चित नसबंदी कांड मामले में करीब 12 साल बाद आखिरकार कोर्ट का फैसला आ गया है। न्यायालय ने इस सनसनीखेज मामले में डॉक्टर आर.के. गुप्ता को दोषी करार दिया है, जबकि अन्य पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
यह फैसला प्रथम सत्र न्यायाधीश शैलेश केतारप की अदालत ने सुनाया। डॉक्टर आर.के. गुप्ता पर गैर इरादतन हत्या (कुल्पेबल होमिसाइड) का आरोप सिद्ध हुआ। मामले में शामिल अन्य 5 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया
क्या था पूरा मामला?
साल 2014 में सकरी स्थित नेमिचन्द्र जैन अस्पताल में नसबंदी शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में करीब 85 महिलाओं और पुरुषों की नसबंदी की गई। जिसमें 13 महिलाओं और 5 पुरुषों की मौत हो गई। बाद में सामने आया कि ऑपरेशन के दौरान भारी लापरवाही बरती गई थी, जिससे यह दर्दनाक घटना हुई।
इसी दौरान नवंबर 2014 में पेंडारी और पेंड्रा क्षेत्र में आयोजित शिविरों में- कुल 137 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया। इनमें से 18 लोगों की मौत हो गई।
चौंकाने वाली बात यह रही कि- डॉक्टर आर.के. गुप्ता ने सिर्फ 3 घंटे में 83 ऑपरेशन किए थे। जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
पोस्टमॉर्टम और कल्चर रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई थी कि- ऑपरेशन के बाद संक्रमण (इन्फेक्शन) फैला, दवाइयों और प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही हुई यही कारण इन मौतों का मुख्य वजह माना गया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया था। मामला इतना बड़ा हो गया था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी बिलासपुर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मिले थे।
लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रिया के बाद अब जाकर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। हालांकि, यह सवाल अभी भी कायम है- क्या यह फैसला पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त है? क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?







