रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बालोद स्काउट गाइड टेंडर को लेकर बुधवार को जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा, वहीं सरकार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को नियमसम्मत बताया।
विपक्ष के विधायक राघवेंद्र सिंह ने सदन में मुद्दा उठाते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को 13 नवंबर को स्काउट गाइड का पदेन अध्यक्ष मनोनीत किया गया, जबकि टेंडर 10 नवंबर को ही जारी हो चुका था। उन्होंने सवाल उठाया कि टेंडर से पहले बैठक हुई थी या नहीं और इस प्रक्रिया को किसने मंजूरी दी।
राघवेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि पहले टेंडर में 92 शर्तें निर्धारित की गई थीं, जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 22 नवंबर को दोबारा टेंडर जारी किया गया, जिसमें शर्तों की संख्या घटाकर 52 कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य 4 तारीख को शुरू कर केवल तीन दिनों में पूरा कर लिया गया, जो संदेह पैदा करता है।
मामले पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में जिला कलेक्टर शामिल थे और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स तथा राज्य स्काउट गाइड संस्था इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल शिक्षा मंत्री पद पर आने के साथ ही व्यक्ति स्वतः स्काउट गाइड का पदेन अध्यक्ष बन जाता है और 13 नवंबर को जारी पत्र केवल औपचारिकता के लिए था। मंत्री ने यह भी कहा कि कई टेंडर भारत स्काउट गाइड की ओर से भी जारी किए जाते हैं, जिनके आधार पर कार्य शुरू हो जाता है।
इस दौरान “बोरे-बासी” को लेकर सदन में हंगामा भी हुआ। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने बिना टेंडर फाइनल हुए काम शुरू करने पर सवाल उठाया, जबकि सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए बोरे-बासी आयोजन का जिक्र किया। इस पर विपक्ष ने मुद्दा भटकाने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। स्थिति बिगड़ने पर सभापति ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया।
अपने अंतिम प्रश्न में राघवेंद्र सिंह ने टेंडर से पहले काम शुरू होने की प्रक्रिया की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि पहले भी इस तरह के प्रश्न उठे हैं और संबंधित कार्य केंद्र स्तर पर जारी टेंडर के तहत हुआ था, न कि राज्य सरकार के।









