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नक्सलियों ने देखी सदन की कार्यवाही, पूर्व नक्सली बोले- मुख्यधारा में लौटना नया अनुभव

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जब बीजापुर और कांकेर जिलों से आए 140 आत्मसमर्पित नक्सली विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे। इनमें 54 महिलाएं और 86 पुरुष शामिल थे। यह कदम न केवल उनके लिए बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही देखने के बाद अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि पहली बार उन्हें यह समझने का मौका मिला कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों को किस तरह उठाते हैं। उन्होंने देखा कि सदन में सवाल कैसे पूछे जाते हैं और विकास एवं सामाजिक मुद्दों पर किस तरह चर्चा होती है।

कई आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि समाज की मुख्यधारा में वापस आने के बाद यह उनके लिए एक नया अनुभव है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस तरह के कार्यक्रम उन्हें लोकतंत्र और संविधान की कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं।


कांकेर से आत्मसमर्पण करने वाले बोधराम धुर्वा ने बताया कि वह 19 वर्षों तक नक्सल संगठन से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद सरकार द्वारा किए गए वादों पर काम हो रहा है। बोधराम ने यह भी कहा कि अभी भी कई नक्सली मुख्यधारा में वापस नहीं आए हैं।


इस पहल को सरकार की पुनर्वास नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ना और उन्हें समाज में पुनः स्थापित करना है। यह कदम न केवल समाज में शांति स्थापित करने में मदद करेगा, बल्कि नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सहभागिता बढ़ाने का भी एक प्रयास है।


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