नई दिल्ली/रायपुर, 18 मई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित तीन हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाला (CG Liquor Scam) मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी और सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी अनिल टुटेजा को एक बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई करने के बाद उन्हें सशर्त नियमित जमानत (Conditional Bail) दे दी है। अनिल टुटेजा इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई के बाद से ही न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद थे।
“ट्रायल पूरा होने में लग सकता है लंबा समय” – सुप्रीम कोर्ट
माननीय सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने मामले की गंभीरता और वर्तमान स्थिति को देखते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित प्रमुख टिप्पणियाँ कीं:
- लंबी हिरासत: पीठ ने संज्ञान लिया कि अनिल टुटेजा 21 अप्रैल 2024 से लगातार जेल में बंद हैं।
- गवाहों की लंबी सूची: अदालत ने कहा कि इस मामले में अभी करीब 85 गवाहों से पूछताछ की जानी बाकी है, जिसके कारण ट्रायल (मुकदमा) पूरा होने में एक लंबा समय लग सकता है।
- समानता का सिद्धांत: पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर आ चुके हैं।
- आरोपों की सच्चाई: अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन उनकी असल सच्चाई ट्रायल के दौरान ही तय होगी।
जमानत के साथ लगाई गईं ये सख्त शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने अनिल टुटेजा को जमानत की राहत देने के साथ ही कुछ बेहद कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है:
- छत्तीसगढ़ में प्रवेश पर रोक: जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद अनिल टुटेजा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा।
- अधिकारियों से संपर्क प्रतिबंधित: वे छत्तीसगढ़ या अन्य कहीं भी किसी भी सेवारत (Serving) सरकारी अधिकारी से न तो मुलाकात कर सकेंगे और न ही किसी माध्यम से संपर्क करेंगे।
- जांच को प्रभावित न करना: आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या अदालती जांच में बाधा डालने की कोई भी कोशिश नहीं करेगा।
क्या है 3,000 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा/एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच अंजाम दिया गया था।
जांच एजेंसियों का दावा:
इस मामले में एक बेहद संगठित सिंडिकेट ने राज्य की शराब नीति को जानबूझकर कमजोर किया। इसके जरिए लगभग ₹2,883 करोड़ से लेकर ₹3,000 करोड़ रुपये तक की अवैध कमाई (क्राइम प्रोसीड्स) की गई। इस सिंडिकेट में राज्य के शीर्ष नौकरशाह, रसूखदार राजनीतिक नेता और शराब कारोबारी शामिल थे। ईडी ने इस मामले में अब तक मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 9 हाई-प्रोफाइल आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब अनिल टुटेजा के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि सख्त शर्तों के कारण वे छत्तीसगढ़ से दूर रहेंगे।










