अंबिकापुर के महामाया मंदिर और महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी के संरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। शुक्रवार सुबह भारी पुलिस बल और चार एक्सीवेटर की मौजूदगी में मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। पहले दिन 20 से अधिक मकानों को हटाने की तैयारी की गई है।
वन विभाग के मुताबिक डबरीपानी, श्रीगढ़, खैरबार, नवागढ़ और बधियाचुआ क्षेत्र में लंबे समय से वनभूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे थे। धीरे-धीरे यहां सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं के साथ नए रिहायशी इलाके बस गए थे।
वन विभाग ने 27 मार्च 2026 को अतिक्रमणकारियों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे। दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया, लेकिन वैध कागजात पेश नहीं किए गए। इसके बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की।
कार्रवाई में देरी के दौरान कई अतिक्रमणकारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया और कुछ को स्थगन आदेश मिल गया। भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने वनभूमि से कब्जा हटाने के निर्देश दिए।
गुरुवार देर शाम वन विभाग की टीम ने इलाके में मुनादी कर शुक्रवार से कार्रवाई शुरू होने की सूचना दी। नोटिस चस्पा होने के बाद कई लोगों ने रात में ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था। शुक्रवार सुबह वन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की।
भारतीय वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी और अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट श्वेता काम्बोज ने बताया कि केवल डबरीपानी क्षेत्र में 54 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए हैं। वहीं महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी, नवागढ़ और घुटरापारा क्षेत्र में कुल 157 अतिक्रमणकारी चिह्नित हुए हैं। जिन मामलों में न्यायालय से स्थगन आदेश या FRA के तहत आवेदन लंबित हैं, उन्हें फिलहाल कार्रवाई से अलग रखा गया है।










