जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत मिडिल स्कूल चौराभांठा में मध्यान्ह भोजन करने के बाद एक बार फिर भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को स्कूल में परोसे गए मध्यान्ह भोजन के बाद 12 से अधिक बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने लगी, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्यान्ह भोजन के तहत बच्चों को खीर और पूड़ी परोसी गई थी। भोजन करने के कुछ ही समय बाद पहले एक-दो बच्चों ने पेट दर्द की शिकायत की, लेकिन देखते ही देखते कई अन्य बच्चों की हालत भी खराब होने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल के शिक्षकों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी।
कुछ ही देर में एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी बीमार बच्चों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने बच्चों का तत्काल इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में फूड प्वाइजनिंग जैसे लक्षण पाए गए हैं। फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी सक्रिय हो गए। प्रारंभिक जांच में मध्यान्ह भोजन में परोसी गई खीर या पूड़ी की गुणवत्ता पर संदेह जताया जा रहा है। भोजन में इस्तेमाल किए गए दूध, तेल और अन्य सामग्री की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि स्कूलों में मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की नियमित और सख्त जांच होनी चाहिए। अभिभावकों ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चों की तबीयत बिगड़ते ही बिना किसी देरी के उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया और उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई है। स्वास्थ्य विभाग बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, वहीं शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत फूड प्वाइजनिंग के कारण बिगड़ी या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। यह घटना एक बार फिर स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को उजागर करती है।










