कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाकी की मुस्तैदी और सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ की सिटी कोतवाली थाने के भीतर एक युवक द्वारा खुलेआम रील (Reel) बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि रील बनने के दौरान थाने के भीतर न तो कोई पुलिसकर्मी नजर आया और न ही किसी ने युवक को टोकने की जहमत उठाई।
रील में युवक ‘लाटसाहब’, थाने में पुलिस ‘नदारद’
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक बिना किसी डर या झिझक के थाने के अति-संवेदनशील ऑफिस क्षेत्र (कार्यालय) में घूम-घूमकर रील बना रहा है। वीडियो के बैकग्राउंड में बज रहे गाने और युवक के तेवर यह बताने के लिए काफी हैं कि उसे कानून का कोई खौफ नहीं था। पूरी रील के दौरान थाने में पुलिसकर्मियों की उपस्थिति ‘शून्य’ दिखाई दे रही है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि मानो पूरा थाना ही भगवान भरोसे चल रहा हो।
पुलिस की अजीबोगरीब कार्रवाई: “थाने में रील बनाना पाप है, पुलिस हमारी…”
जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पुलिस की किरकिरी होने लगी, तो महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस ने युवक को ढूंढ निकाला। लेकिन, कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने युवक से एक और वीडियो बनवाया, जो अब और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।
इस नए वीडियो में युवक कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते हुए बोल रहा है:
“थाने में रील बनाना पाप है, पुलिस हमारी बाप है।”
पुलिस की इस ‘थूक-पॉलिश’ वाली और बचकानी कार्रवाई ने अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के बजाय पुलिस की कार्यप्रणाली पर और ज्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं। बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए युवक से ऐसा बयान दिलवाया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए 4 बड़े सवाल
इस पूरी घटना ने कवर्धा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर की जनता अब पुलिस प्रशासन से ये तीखे सवाल पूछ रही है:
- 1. इतनी ढीली सुरक्षा क्यों?: क्या कोई भी ऐरा-गैरा व्यक्ति सीधे थाने के संवेदनशील दफ्तरों में दाखिल हो सकता है? अगर आम युवक बिना रोक-टोक अंदर जा सकता है, तो कल को कोई शातिर अपराधी या असामाजिक तत्व बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है।
- 2. घटना के समय स्टाफ कहाँ था?: वीडियो में न तो कोई ड्यूटी स्टाफ दिख रहा है और न ही कोई अधिकारी। सवाल उठता है कि क्या पूरी कोतवाली उस वक्त खाली थी? अगर जवान ड्यूटी पर थे, तो वे कहाँ गायब थे?
- 3. जिम्मेदारी किसकी?: सिटी कोतवाल और उस वक्त ड्यूटी पर तैनात संतरियों (जवानों) की क्या जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या इस लापरवाही के लिए उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
- 4. अपराधियों में डर कैसे पैदा होगा?: जब आम लोग थाने के भीतर घुसकर पुलिस का मज़ाक उड़ा रहे हैं, तो बड़े अपराधियों और गुंडे-बदमाशों के मन में पुलिस का खौफ कैसे कायम रहेगा?










