छत्तीसगढबड़ी खबर

कवर्धा में PWD का ‘अजूबा’: 4 करोड़ की सड़क के बीचों-बीच छोड़ दिए बिजली के खंभे और हैंडपंप, बड़े हादसों को न्योता

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में इन दिनों विकास कार्यों का ‘मजमा’ लगा हुआ है। सूबे के उप मुख्यमंत्री, स्थानीय सांसद और विधायक हर रोज करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण कर रहे हैं। लेकिन, नेताओं की वाहवाही के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले की कार्य एजेंसियां और ठेकेदार जनता के पैसे का किस तरह मज़ाक उड़ा रहे हैं, इसका एक जीता-जागता और अजूबा उदाहरण कवर्धा में देखने को मिला है, जिसने लोक निर्माण विभाग (PWD) की पोल खोलकर रख दी है।

मामला जिले के पिपरिया-गांगपुर मार्ग का है। यहाँ लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से करीब 3.80 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन ठेकेदार और PWD के इंजीनियरों की ‘महान’ बुद्धिमानी देखिए—करोड़ों की इस चकाचक सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच बिजली के हाई-वोल्टेज खंभे और सरकारी हैंडपंप (नल) को वैसे का वैसा ही छोड़ दिया गया है।

अब इस “अजूबा सड़क” की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, और लोग पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली का जमकर मज़ाक उड़ा रहे हैं।


निर्माण में भारी अनियमितता: धंसने लगे शोल्डर

स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का कहना है कि कायदे से सड़क बनाने से पहले बिजली के खंभों और हैंडपंप को शिफ्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन ठेकेदार ने बिना किसी प्लानिंग के जल्दबाजी में डामरीकरण कर दिया। सड़क कई जगहों पर अभी से ही ऊंची-नीची दिखने लगी है। इतना ही नहीं, सड़क के किनारों पर बनाए गए शोल्डर (साइड की मिट्टी/कंक्रीट) शुरुआती दौर में ही धंसने लगे हैं, जिससे भ्रष्टाचार की बू आ रही है। रात के अंधेरे में सड़क के बीच में खड़े ये खंभे और हैंडपंप किसी भी वाहन चालक के लिए काल बन सकते हैं। ग्रामीणों को डर है कि यहाँ कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।


अधिकारियों का घिसा-पिटा रोना: “अनुमति मिलने में देरी हुई”

जब पानी सिर से ऊपर चला गया और मामला मीडिया में उछला, तो हमेशा की तरह पीडब्ल्यूडी (PWD) के अधिकारियों ने अपना बचाव करना शुरू कर दिया है। विभाग की दलील है कि उन्होंने बिजली खंभे हटाने के लिए विद्युत विभाग से अनुमति मांगी थी, लेकिन वहां से परमिशन मिलने में देरी हुई। अब अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शेष खंभों और हैंडपंप को जल्द ही शिफ्ट कर लिया जाएगा और सड़क में सुधार किया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अनुमति नहीं मिली थी, तो ठेकेदार को सड़क बनाने की इतनी हड़बड़ी क्यों थी? क्या सिर्फ बिल पास कराने के चक्कर में जनता की जान को जोखिम में डाल दिया गया?


ग्रामीणों ने की स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग

पिपरिया और आसपास के ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे की इस तरह बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोगों ने मांग की है कि इस घटिया और गैर-जिम्मेदाराना निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार PWD के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

Related Posts

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से मोबाइल लूटने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने बरामद की बाइक और फोन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है,…

1 of 316