रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के दावों के बीच एक बार फिर सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है। धान न बिकने और टोकन के लिए भटकने से परेशान एक और किसान ने आत्महत्या की कोशिश की है। किसान को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने प्रदेश में किसानों की स्थिति और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन दिनों से चॉइस सेंटर की खाक छान रहा था किसान
परिजनों के मुताबिक, पीड़ित किसान अपनी उपज बेचने के लिए पिछले तीन दिनों से चॉइस सेंटर के चक्कर काट रहा था। लेकिन तकनीकी दिक्कतों और मोबाइल नंबर से संबंधित त्रुटियों का हवाला देकर उसे हर बार बैरंग लौटा दिया गया। घर के बाहर खुले में पड़ा धान और परिवार की आर्थिक चिंता ने किसान को इस कदर तनाव में डाल दिया कि उसने अपनी जीवनलीला समाप्त करने जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
कोरबा सांसद ने जताई नाराजगी
इस घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा सांसद ने राज्य सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा “किसान का धान घर में पड़ा सड़ रहा है और उसे बेचने के लिए टोकन तक नहीं मिल पा रहा है। अन्नदाता आज अपनी फसल बेचने के लिए खून के आंसू रो रहा है। यह शासन की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।”
सिलसिला जारी: पिछले महीने भी एक किसान ने काटा था गला
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में यह पहली घटना नहीं है। पिछले महीने मनबोध गांड़ा नाम के एक अन्य किसान ने भी धान न बिकने से परेशान होकर ब्लेड से अपना गला काट लिया था। हालत गंभीर होने पर उसे रायपुर रेफर किया गया था, जहां उसका इलाज अब भी जारी है। बार-बार होती इन घटनाओं ने प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है।









