रायपुर। एक ओर देश और प्रदेश में आज अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में अपने अधिकारों और 6 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे दिव्यांगजन परेशान नजर आए। दिव्यांगजन बीते 10 महीनों से अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को सामने रख रहे हैं।
इसी क्रम में आज बड़ी संख्या में दिव्यांगजन जयस्तंभ चौक में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर अपना कार्यक्रम मनाने के लिए एकत्रित हो रहे थे। तभी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और उन्हें पहले मरीन ड्राइव की ओर ले जाया गया, इसके बाद बसों में भरकर जबरदस्ती पुलिस लाइन ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके साथ कैदियों जैसा व्यवहार किया गया।
दिव्यांगजनों की प्रमुख 6 सूत्रीय मांगों में फर्जी दिव्यांगों की जांच कर कार्रवाई करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई लोग जाली दस्तावेज़ बनाकर दिव्यांग श्रेणी में रोजगार हासिल कर रहे हैं, जिससे वास्तविक दिव्यांग बेरोजगार रह जाते हैं। इसके अलावा दिव्यांग पेंशन में बढ़ोतरी और महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना की तर्ज पर दिव्यांग वंदन योजना शुरू करने की मांग भी वे लंबे समय से कर रहे हैं, ताकि दिव्यांग महिलाओं को आर्थिक सहायता मिल सके।
इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आंदोलन की कोशिश के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को साहू भवन में हाउस अरेस्ट कर लिया था। दिव्यांगजन विभिन्न जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी मांगों को उठाते रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़ें के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की कोशिश भी की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
लगातार प्रदर्शन, बार-बार पुलिस कार्रवाई और अनसुनी होती मांगें—इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या दिव्यांगजनों की समस्याओं पर सरकार ध्यान देगी? क्या उनकी मांगें पूरी होंगी? दिव्यांगजन उम्मीद लगाए बैठे हैं कि राज्य सरकार जल्द उनकी समस्याओं का समाधान करेगी, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें।










