नई दिल्ली। भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है। यूनेस्को (UNESCO) ने देश के प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्व दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक घोषणा आज राजधानी दिल्ली में की जाएगी।
इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए दिल्ली के कला, संस्कृति, भाषा एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि यह पूरे भारतीय समाज के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता को भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक पहचान बताया।
पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना
कपिल मिश्रा ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दीपावली का यूनेस्को सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक मूल्यों की विश्वस्तरीय मान्यता है।
लाल किले में होगा भव्य समारोह
यूनेस्को की घोषणा के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार ने भव्य कार्यक्रमों की तैयारी की है। लाल किले पर दीपावली उत्सव, विशाल दीया प्रज्वलन, दिल्लीभर में सड़कों और चौकों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था, सरकारी इमारतों का दीपोत्सवी सज्जा और दिल्ली हाट में मुख्यमंत्री एवं कैबिनेट की उपस्थिति में विशेष आयोजन किया जाएगा।
कपिल मिश्रा ने कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि ‘अंधकार से प्रकाश’ की अनंत भावना और भारतीय संस्कृति का सार है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्साह और सद्भाव के साथ शामिल होने की अपील की।
यूनेस्को सम्मेलन में भारत की समृद्ध परंपराओं का प्रदर्शन
लाल किले की प्राचीर पर 7 दिसंबर से यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पर अंतर-सरकारी समिति का 20वां सम्मेलन चल रहा है, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उद्घाटन सत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल डॉ. खालिद अल एनानी, और भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली इस वैश्विक आयोजन की मेजबानी के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है क्योंकि यह शहर 3,000 वर्षों से अधिक पुरानी सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक है, प्राचीन इंद्रप्रस्थ से लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक राजधानी तक।
उन्होंने भारत की समृद्ध अमूर्त विरासत, वेद, उपनिषद, योग, प्रकृति–ऋतु आधारित त्योहारों और विविध लोक कलाओं—का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति संग्रहालयों में नहीं, बल्कि लोगों की जीवन शैली में जीवित रहती है।
भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मिली वैश्विक पहचान
दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक शक्ति को प्रमाणित करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करता है।









