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CG NEWS- गेट परीक्षा में हाईटेक नकल कांड का खुलासा, परीक्षा केंद्र से 50 मीटर दूर बनाया ‘कंट्रोल रूम’, 10वीं पास युवक चला रहा था पूरा नेटवर्क

रायपुर। राष्ट्रीय स्तर की Graduate Aptitude Test in Engineering (GATE) परीक्षा में हाईटेक नकल कांड की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरोह ने पुलिस और फ्लाइंग स्क्वायड से बचने के लिए दूर छिपने के बजाय परीक्षा केंद्र ION Digital Zone से महज 50 मीटर दूर एक चाय-नाश्ते के ठेले को ही अपना ‘कंट्रोल रूम’ बना रखा था।

आरोपी दर्शन सहवाग सामान्य ग्राहक बनकर भीड़ में बैठा था और मोबाइल व विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए अंदर परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों से लगातार संपर्क में था। कम दूरी के कारण ब्लूटूथ कनेक्टिविटी मजबूत रही और अंदर बैठे परीक्षार्थियों तक साफ आवाज पहुंचती रही।

प्रश्न मिलते ही बाहर बैठी टीम गूगल और अन्य ऑनलाइन स्रोतों से जवाब खोजकर तुरंत ट्रांसमिट कर देती थी।


10वीं पास चला रहा था इंजीनियरों का ऑपरेशन

सबसे बड़ा विरोधाभास यह सामने आया कि अंदर नकल कर रहे अभ्यर्थी बीटेक डिग्रीधारी इंजीनियर थे, जबकि पूरे ऑपरेशन की कमान संभाल रहा दर्शन केवल 10वीं पास है।

गिरोह में शामिल गिरफ्तार अभियुक्त अमर चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट में असिस्टेंट इंजीनियर है, जबकि लक्ष्मीनारायण हरियाणा की एक निजी कंपनी में कार्यरत है। दोनों को 1 से 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन मिल रहा था। बेहतर भविष्य के लिए एमटेक का सपना लेकर आए इन इंजीनियरों ने शॉर्टकट का रास्ता चुना, जो अब उनकी नौकरी पर भारी पड़ सकता है।


‘फिट इंडिया’ ब्रांड एंबेसडर और पर्वतारोही भी शामिल

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के साथ प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार और बंटी भी जवाब खोजने में सहयोग कर रहे थे।

हिसार जिले के गांव मिंगनी खेड़ा निवासी नरेंद्र कुमार ने 30 दिसंबर 2025 को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड बनाया था और बताया जा रहा है कि वह इस समय Fit India Movement का ब्रांड एंबेसडर भी है।

नरेंद्र कुमार के पिता आबकारी एवं कराधान विभाग से सेवानिवृत्त ईटीओ हैं और उसके दो भाई हरियाणा सरकार में जूनियर इंजीनियर हैं। नरेंद्र इससे पहले माउंट मनास्लु, अन्नपूर्णा और एल्ब्रुस जैसी दुर्गम चोटियों को फतह कर चुका है। गांव में उसके इस कृत्य से लोग हैरान हैं।


दिल्ली के गफ्फार मार्केट से खरीदे गए डिवाइस

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दिल्ली के करोल बाग स्थित मशहूर Gaffar Market से खरीदे गए थे।

आरोपियों ने वहां से जीएसएम सिम वाले सूक्ष्म ईयरपीस और ब्लूटूथ डिवाइस खरीदे, जिन्हें आसानी से कपड़ों या जूतों में छिपाया जा सके। पूरी तैयारी के बाद गिरोह फ्लाइट से दिल्ली से रायपुर पहुंचा, ताकि कम समय में बिना शक के योजना को अंजाम दिया जा सके।


हरियाणा में बैठा है मास्टरमाइंड

रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट खंगाले हैं। जांच में हरियाणा में बैठे एक शख्स की भूमिका सामने आई है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि गिरोह ने अब तक देश भर में कितनी परीक्षाओं में इस तरह सेंधमारी की है।


सक्षम परिवार, पेशेवर पृष्ठभूमि

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से नहीं हैं।

  • लक्ष्मीनारायण चंडीगढ़ में सड़क निर्माण एजेंसी में कार्यरत है।
  • अमर जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहे पुल प्रोजेक्ट से जुड़ा है।
  • सुमित सहवाग प्रॉपर्टी व्यवसाय से जुड़ा है, जबकि दर्शन खेती करता है।
  • सुमित के पिता हरियाणा पुलिस से सेवानिवृत्त हैं।

पुलिस की कार्रवाई जारी

रायपुर पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि इस हाईटेक नकल कांड में शामिल हर व्यक्ति को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तकनीक का दुरुपयोग किस हद तक किया जा सकता है।

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