नई दिल्ली। होली का पर्व भारत में हर साल बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन 2026 में इसकी तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी असमंजस की स्थिति है। इसका मुख्य कारण है 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्रग्रहण, जिसके चलते पर्व के शुभ समय में बदलाव आया है।
होलिका दहन 2 मार्च को, रात 12:50 से 2:02 तक शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा पूंछ काल में होलिका दहन करना ही शुभ माना जाता है। इस साल होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 2 मिनट के बीच रहेगा।
चंद्रग्रहण 3 मार्च को, रंगोत्सव 4 मार्च को
इसके अगले दिन, 3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। इस कारण रंगोत्सव यानी होली का पर्व 4 मार्च 2026 को पूरे भारत में मनाया जाएगा।
चंद्रग्रहण की टाइमिंग
- ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3 बजकर 20 मिनट
- मध्यकाल: शाम 5 बजकर 4 मिनट
- मोक्षकाल: शाम 6 बजकर 47 मिनट
- चंद्रमा का उदय: शाम 5 बजकर 59 मिनट
पूरे भारत में ग्रहण का प्रारंभ और मध्यकाल दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रमा उदय से पहले ग्रहण शुरू हो जाएगा। केवल मोक्षकाल ही दिखाई देगा।
सूतक काल
सनातन धर्म के अनुसार, चंद्र ग्रहण में 9 घंटे का सूतक काल होता है। इस हिसाब से, 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।
चंद्रग्रहण कहां दिखाई देगा
इस चंद्रग्रहण को भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी देखा जा सकेगा।
पंडित वेद प्रकाश मिश्रा का मत
ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार होली का रंगोत्सव होलिका दहन के अगले दिन प्रातः काल मनाया जाता है। लेकिन 3 मार्च को ग्रहण और सूतक काल होने के कारण रंगोत्सव उसी दिन नहीं करना उचित है। इस कारण इस साल रंगोत्सव 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
होलिका दहन का सही समय
- 2 मार्च 2026 को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है।
- शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा शुरू हो रही है।
- भद्रा मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12:50 से 2:02 बजे तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है।
ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण के बाद पूजा
रितु अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद 3 मार्च को चौसठ्ठी देवी की यात्रा और पूजन किया जाएगा।










