धमतरी/कांकेर। छत्तीसगढ़ के धमतरी वनमंडल से वन्यजीवों के शिकार और क्रूरता का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिरगुड़ी परिक्षेत्र के आरक्षित वन में तीन धामन सांप (असोड़िया) और एक गोह का शिकार कर उसका मांस पकाकर खाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। आरोपियों ने शिकार और मांस पकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था, जिसके बाद वन विभाग ने त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
शिकार के बाद बनाई सब्जी, सोशल मीडिया पर धौंस जमाने डाला वीडियो
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 4 जुलाई की है। शिकारी गिरोह ने बिरगुड़ी परिक्षेत्र के अंतर्गत खैरभर्ती बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 433 में घुसकर तीन धामन सांप और एक गोह (Monitor Lizard) का शिकार किया। इसके बाद आरोपी वन्यजीवों के शवों को कांकेर जिले के ग्राम भनसुली ले गए। वहां उन्होंने जीवों के छोटे-छोटे टुकड़े किए, मांस की सब्जी बनाई और पार्टी की। इस पूरी शर्मनाक करतूत का आरोपियों ने वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही एक्शन में आया वन विभाग
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वन महकमे में हड़कंप मच गया। धमतरी वनमंडल के डीएफओ (DFO) ने तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए धमतरी और कांकेर वनमंडल के कर्मचारियों और यूएसटीआर (एंटी पोचिंग स्कवॉड) की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने मोबाइल लोकेशन और वीडियो के आधार पर कांकेर जिले के नरहरपुर तहसील के ग्राम भनसुली में दबिश दी और घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सूची
वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए ग्राम भनसुली (तहसील नरहरपुर, जिला कांकेर) के रहने वाले निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- विनोद कुमार टेकाम (26 वर्ष)
- घसिया (20 वर्ष)
- प्रदीप नेताम (20 वर्ष)
- शैलेन्द्र कुमार यादव (26 वर्ष)
- शिवानंद मरकाम (23 वर्ष)
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई, 14 दिन की जेल
गोह और धामन सांप भारतीय वन्यजीव कानून के तहत संरक्षित जीव हैं। वन विभाग ने सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की गंभीर धाराओं— 2(20), 9, 39, 50, 51 एवं 52 के तहत अपराध दर्ज किया है।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को नगरी के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया है। वन विभाग इस मामले में आगे की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच जारी रखे हुए है।









