रायपुर। भीमराव अंबेडकर अस्पताल परिसर में सोमवार को छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों ने राज्य सरकार के हालिया फैसले के खिलाफ काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा पीजी सीटों में राज्य कोटे को 50% से घटाकर 25% किए जाने से नाराज़ छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपना विरोध दर्ज कराया और मांग की कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में तुरंत उठाया जाए।
काली पट्टी, तख्तियां और कैंडल- छात्रों का शांत लेकिन सशक्त संदेश
अस्पताल के मुख्यद्वार पर बड़ी संख्या में MBBS और इंटरर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राएं जुटे।
उनकी तख्तियों पर लिखा था-
- “PG में छत्तीसगढ़ का हक लौटाओ”
- “50% राज्य कोटा बहाल करो”
- “हमारे भविष्य से खिलवाड़ मत करो”
छात्रों ने काली पट्टी बांधी और कैंडल जलाकर सरकार की चुप्पी पर नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि यह आंदोलन सीटों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के अधिकारों की रक्षा का है।
ग्रामीण सेवा के बाद भी कोटा घटाना दोहरी मार: छात्र
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के MBBS डॉक्टर पहले से ही दो वर्ष की अनिवार्य ग्रामीण सेवा पूरी करते हैं। इसके बाद पीजी कोटा घटाना उनके साथ सीधा अन्याय है।
छात्रों का कहना है-
- कोटा घटने से स्थानीय छात्रों की प्रतिस्पर्धा राष्ट्रीय स्तर पर और कठिन हो जाएगी
- बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों के लिए जगह बढ़ेगी
- राज्य के मेडिकल संसाधनों में छत्तीसगढ़ के युवाओं की हिस्सेदारी कम हो जाएगी
कई छात्रों ने इसे “बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति” बताते हुए कहा कि- “सेवा राज्य से, लेकिन अवसर बाहर वालों को यह नीति स्वीकार नहीं।”
विधानसभा से उम्मीदें- 50% राज्य कोटा बहाल करने की मांग
छात्र नेताओं ने स्पष्ट कहा कि आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को शीर्ष प्राथमिकता के साथ उठाया जाए।
उनकी मांगें हैं-
- PG सीटों में 50% राज्य कोटा तुरंत बहाल हो
- स्थानीय छात्रों के कैरियर अवसरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए राज्य के डॉक्टरों को पर्याप्त अवसर दिए जाएं
छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई, तो आंदोलन को राज्यव्यापी बनाया जाएगा।
सरकार की चुप्पी पर नाराज़गी
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक कोई ठोस बयान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा- “यह सिर्फ हमारा भविष्य नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था का भविष्य है।” छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार तुरंत निर्णय नहीं लेती, तो वे अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और राजधानी रायपुर में बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।








