धमतरी: छत्तीसगढ़ में ‘विकसित भारत-जीरामजी जनजागरण अभियान 2026’ के बीच अब नाथूराम गोडसे की एंट्री हो गई है। योजनाओं के नामकरण और विचारधारा की लड़ाई अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है। धमतरी में मीडिया से चर्चा करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने गोडसे को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
भूपेश बघेल का हमला: “मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गोडसेवादी सोच”
विवाद की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। बघेल ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा— “नाथूराम गोडसे मुर्दाबाद, गोडसेवादी मुर्दाबाद”। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा (MGNREGA) से महात्मा गांधी का नाम हटाना ‘गोडसेवादी सोच’ का ही परिणाम है।
मंत्री टंकराम वर्मा का पलटवार: “गोडसे राष्ट्रवादी थे”
मंगलवार को धमतरी भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान जब मंत्री टंकराम वर्मा से बघेल के बयान पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रवादी व्यक्ति थे।” योजनाओं के नाम बदलने के विवाद पर मंत्री ने कहा पहले सरकारी योजनाएं किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं होती थीं। कांग्रेस ने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम जोड़कर योजनाओं का राजनीतिकरण किया। कांग्रेस महापुरुषों का नाम मिटाकर केवल अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर योजनाएं चलाती आई है। मनरेगा में अब तक काम केवल कागजों पर था, लेकिन अब धरातल पर बदलाव दिखेगा।
कांग्रेस का तीखा प्रहार: “भाजपा अपना स्टैंड साफ करे”
मंत्री वर्मा के बयान के तुरंत बाद कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे आधिकारिक तौर पर गोडसे को राष्ट्रवादी मानते हैं? शुक्ला ने सवाल किया कि भाजपा बताए— “गोडसे राष्ट्रवादी था या स्वतंत्र भारत का पहला आतंकी और हत्यारा?”
क्यों गरमाया है मामला?
दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कई योजनाओं के स्वरूप और नाम में किए जा रहे बदलावों को कांग्रेस ‘गांधी बनाम गोडसे’ की वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। वहीं, भाजपा इसे ‘परिवारवाद बनाम राष्ट्रवाद’ और बेहतर क्रियान्वयन (Implementation) का मुद्दा बता रही है।









