जगदलपुर/हैदराबाद: नक्सल संगठन की सबसे घातक इकाई ‘बटालियन नंबर 1’ के कमांडर-इन-चीफ बारसे देवा के समर्पण की कहानी में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। 3 जनवरी को हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस के सामने हुए हाई-प्रोफाइल समर्पण को खुद बारसे देवा ने ही “फर्जी” करार दे दिया है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान देवा ने स्पष्ट कहा कि उसने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद समर्पण का नाटक रचा।
“काम से जा रहा था, रास्ते में पकड़ लिया”
बारसे देवा ने पुलिस की थ्योरी को सिरे से नकारते हुए बताया कि वह सरेंडर करने के लिए जंगल से बाहर नहीं निकला था। उसने घटनाक्रम का खुलासा करते हुए कहा वह संगठन के किसी काम से बोलेरो वाहन में सवार होकर अपने साथियों के साथ छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पार कर रहा था।तेलंगाना पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही पकड़ लिया और चार दिनों तक अज्ञात स्थान पर रखकर पूछताछ की। देवा के अनुसार, 3 जनवरी को उसे हैदराबाद ले जाया गया और डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष सरेंडर शो कर दिया गया। उसने पुलिस को सरेंडर के लिए कोई संदेश भेजने की बात को भी गलत बताया।
हथियारों का सच: “विदेशी नहीं, फोर्स से लूटे हुए हथियार हैं”
समर्पण के दौरान पुलिस ने इजराइल निर्मित तावोर (Tavor) और अमेरिकन कॉल्ट एम-4 (Colt M4) जैसे अत्याधुनिक हथियार दिखाए थे। इस पर देवा ने बड़ा बयान दिया:
“हमें विदेशों से कोई हथियार नहीं मिलते। ये सभी हथियार सुरक्षा बलों के हैं, जिन्हें हमने मुठभेड़ और हमलों के दौरान उनसे लूटा था।”
हिड़मा की मौत और ‘फर्जी मुठभेड़’ का आरोप
बारसे देवा ने बस्तर के खूंखार नक्सली हिड़मा की मौत को लेकर चल रही अटकलों पर भी चुप्पी तोड़ी। उसने मनीष कुंजाम के उन आरोपों को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि देवजी (देवा) ने हिड़मा को मरवाया। देवा ने कहा हिड़मा को पुलिस ने ही मारा है। वह 27 अक्टूबर 2025 तक हिड़मा के संपर्क में था। अप्रैल में करेंगुट्टा की पहाड़ी पर हुए बड़े ऑपरेशन का जिक्र करते हुए देवा ने दावा किया कि पुलिस ने वहां 36 साथियों को पकड़कर मारा था, जो एक तरह से फर्जी मुठभेड़ थी। उसने बताया कि वह खुद उस वक्त पहाड़ी पर मौजूद था और उसने बड़े नेताओं को वहां से सुरक्षित निकाला था।
संगठन में भर्ती और विचारधारा
देवा ने बताया कि बटालियन में 15 साल से अधिक उम्र के लड़कों को ही भर्ती किया जाता था और इसमें किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की जाती थी। वह खुद जनता की समस्याओं और नक्सल विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में शामिल हुआ था। वर्तमान में उसने अपने साथियों के लिए कोई भी संदेश देने से इनकार कर दिया।









