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टेंट-टेबल PAK के, लेकिन ईरान डील पर साइन जिनेवा में होंगे; आखिर क्यों?

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते पर स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में साइन किए जाएंगे. इस दौरान ईरान और अमेरिका का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रह सकता है. समारोह में ईरान की ओर से मसूद पजेशकियान और अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शामिल होने की भी चर्चा है. पाकिस्तान इस समारोह की मेजबानी करेगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी जानकारी दी है.

बड़ा सवाल यह है कि जब पाकिस्तान इस समारोह की मेजबानी करेगा, तो यह बैठक इस्लामाबाद में क्यों नहीं आयोजित की गई? क्योंकि समझौते को लेकर पहली बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ही हुई थी. मई के आखिर में इस्लामाबाद में दूसरी बैठक की भी तैयारी की गई थी, लेकिन न तो ईरान और न ही अमेरिका के नेता वहां पहुंचे.

जिनेवा में बैठक क्यों?

  1. ईरान इस डील पर हस्ताक्षर जिनेवा में ही करना चाहता था. दरअसल, जब युद्ध की शुरुआत हुई थी, तब अमेरिका और तेहरान के बीच समझौते को लेकर जिनेवा में एक बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उससे पहले ही अमेरिका ने हमला कर दिया. ईरान हस्ताक्षर समारोह के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि अमेरिका जहां से बातचीत छोड़कर गया था, उसे आखिरकार वहीं लौटना पड़ा.
  2. जिनेवा में शांति स्थापित करने के लिए पहले भी कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं. मसलन, फ्रांस-वियतनाम और सोवियत संघ-अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते. इसके अलावा, जिनेवा संधियों के तहत युद्ध में घायल सैनिकों के साथ मानवीय व्यवहार करना अनिवार्य माना गया है. यही वजह है कि जिनेवा को शांति की राजधानी भी कहा जाता है.
  3. सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है. डील पर हस्ताक्षर के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रह सकते हैं. इस्लामाबाद को अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता. 2006 में आखिरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने पाकिस्तान का दौरा किया था.

समझौते में क्या है?
ईरान और अमेरिका के बीच 14 प्वॉइंट्स वाला अस्थाई समझौता हुआ है. इसके तहत ईरान पर अमेरिका कोई हमला नहीं करेगा. बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेगा. इसके अलावा ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर भी अमेरिका आने वाले दिनों में बात करेगा.

ईरान एनपीटी के तहत परमाणु हथियार नहीं बनाने की घोषणा करेगा. इसके बाद ईराrन पर से आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएंगे. वहीं ईरान की जो संपत्ति फ्रीज है, उसे भी अनफ्रीज किया जाएगा. ईरान को राहत के लिए 300 अरब डॉलर भी देने की तैयारी है.

ईरान को फिलहाल अधिकांश पैसे खाड़ी देशों से मिलेंगे. समझौता फाइनल होने के बाद अमेरिका उसे पैसे देगा. हालांकि, समझौते में एक अहम पक्ष इजराइल ने इसे नकार दिया है. इजराइल का कहना है कि उसके सैनिक लेबनान नहीं छोड़ने वाले हैं.

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