रायपुर/दुर्ग। दुर्ग–भिलाई में चल रही बाबा बागेश्वर की हनुमंत कथा अब धार्मिक आयोजन से ज्यादा सियासी मंच बनती नजर आ रही है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है। एक-दूसरे पर सीधे हमलों से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
बाबा बागेश्वर का भूपेश बघेल पर हमला
शुक्रवार को कथा मंच से बोलते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भूपेश बघेल पर कटाक्ष करते हुए उन्हें “विदेश जाने की सलाह” दे डाली। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और वे किसी तरह का पैसा नहीं बटोरते। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि कथा और आयोजनों में मिलने वाली दक्षिणा का उपयोग सामाजिक कार्यों में किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस धन से कन्या विवाह, कैंसर अस्पताल और अन्य जनकल्याणकारी कार्य किए जा रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “जो काम कृपा से हों, वे कृपा से हों और जो दवा से हों, वे दवा से हों। इसी सोच के तहत अस्पताल खोले जा रहे हैं।”
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा
हनुमंत कथा के दौरान बाबा बागेश्वर ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे भारत के हिंदुओं को इस विषय में जागरूक होने की जरूरत है।
उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। साथ ही अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को वापस भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं के लिए भारत आने के रास्ते खोले जाने चाहिए, अन्यथा वहां के हिंदू समाज के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है और उन्हें मजबूरी में धर्म परिवर्तन करना पड़ सकता है।
भूपेश बघेल का तीखा पलटवार
धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री छत्तीसगढ़ में पैसा बटोरने आते हैं और बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। भूपेश बघेल ने एक बार फिर उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती देते हुए सवाल किया कि अगर दिव्य दरबार से लोग ठीक हो रहे हैं, तो फिर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
छत्तीसगढ़ की परंपरा का दिया हवाला
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह भूमि कबीर साहेब और गुरु घासीदास की वाणी से गूंजती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अपनी सनातन परंपरा है और कोई बाहरी व्यक्ति यहां आकर धर्म सिखाने का ठेका नहीं ले सकता।
धार्मिक आयोजन बना राजनीतिक अखाड़ा
दुर्ग–भिलाई में हो रही हनुमंत कथा अब श्रद्धा के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाज़ी का केंद्र बन गई है। एक ओर बाबा बागेश्वर लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भूपेश बघेल उनके इरादों और भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
इस टकराव ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है, जहां धर्म, राजनीति और विचारधारा आमने-सामने नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस बयानबाज़ी के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।







