रायपुर। छत्तीसगढ़ के बजट को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार के तीसरे बजट को “विनाश का बजट” करार देते हुए इसे बेहद निराशाजनक बताया है।
बघेल ने आरोप लगाया कि बजट में महिलाओं, किसानों और मजदूरों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि पौने दो घंटे का भाषण उबाऊ और दिशाहीन रहा। “सैकड़ों-हजारों करोड़ के बजट में विकास की बड़ी घोषणाओं की अपेक्षा थी, लेकिन मंत्री सड़कों और चौक-चौराहों के नाम गिनाते रहे,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।
धान खरीदी पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने की बात कर रही है, लेकिन पिछली बार की तुलना में 7 लाख मीट्रिक टन कम खरीदी हुई है। उन्होंने कहा कि रकबा और उत्पादन बढ़ने के बावजूद खरीदी कम होना चिंताजनक है।
महतारी वंदन योजना पर आरोप
बघेल ने कहा कि महतारी वंदन योजना का पोर्टल बंद है, जिससे नई विवाहित महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रोजगार और शिक्षा पर निशाना
उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के क्षेत्र में केवल बस्तर फाइटर का जिक्र है, अन्य कोई ठोस पहल नहीं दिखती। स्कूल शिक्षा के बजट को लेकर उन्होंने कहा कि “स्वामी आत्मानंद स्कूल के लिए हमारे समय का बजट था, उसी से काम चल रहा है।”
परंपराएं तोड़ने का आरोप
बघेल ने विधानसभा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले विस्तृत चर्चा होती थी, लेकिन अब परंपराएं बदली जा रही हैं। कटौती प्रस्तावों पर चर्चा को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
रेल लाइन और संसाधन पर टिप्पणी
नई रेल लाइन को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश में यात्री स्टॉपेज नहीं दिए जा रहे, केवल मालवाहक ट्रैक बिछाए जा रहे हैं, जिससे राज्य की लौह अयस्क संपदा के दोहन की मंशा नजर आती है।
‘मोदी की गारंटी’ पर सवाल
बघेल ने कहा कि यह सरकार का तीसरा बजट है, लेकिन “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादे, जैसे 500 रुपये में गैस सिलेंडर, पूरे नहीं हुए। उन्होंने सरकार पर कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेने का भी आरोप लगाया।
आवास योजना पर उन्होंने कहा कि 1 लाख 20 हजार रुपये में मकान बनना संभव नहीं है और दूसरी किस्त भी समय पर नहीं मिल रही। वहीं, “घर-घर पानी” के दावे पर उन्होंने कहा कि कई जगह पानी टंकियां तो बन गईं, लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई है।










