Madvi Hidma Killed in Encounter: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन अभियान को आज बड़ी सफलता मिली है। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी मुठभेड़ में पीएलजीए के शीर्ष कमांडर माड़वी हिड़मा को मार गिराया। हिड़मा की पत्नी राजे उर्फ राजक्का समेत कुल 6 माओवादियों की मौत हुई है। यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश-ओडिशा की त्रि-सीमा पर मारे डुमिल्ली जंगल में सुबह 6 से 7 बजे के बीच हुई।
सुरक्षाबलों को नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम ने घेराबंदी की। हिड़मा पर 50 लाख रुपये का इनाम था, और वह सीपीआई (माओइस्ट) की सेंट्रल कमेटी का सबसे कम उम्र का सदस्य था। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के ‘2026 तक नक्सल-मुक्त भारत’ अभियान में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
कौन था माड़वी हिड़मा? एक नन्हा सिपाही से खूंखार कमांडर तक का सफर
माड़वी हिड़मा (उम्र 44 वर्ष), जिसे संतोष, इंदमुल या पोडियाम भीमा के नाम से भी जाना जाता था, बस्तर के सुकमा जिले के पेद्दागेलूर गांव का निवासी था। 1981 में जन्मे हिड़मा का कद-काठी नाटा और दुबला-पतला था, लेकिन उसके रणनीतिक दिमाग ने उसे नक्सली संगठन में शीर्ष पर पहुंचा दिया। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का प्रमुख था और बस्तर से एकमात्र आदिवासी चेहरा था जो माओवादी सेंट्रल कमेटी में शामिल हुआ।
हिड़मा कैसे बना नक्सली?
हिड़मा का नक्सली जीवन बचपन से ही शुरू हो गया। 1990 के दशक में, जब वह मात्र 15 वर्ष का था, तब दंडकारण्य में माओवादी संगठन की भर्ती अभियान ने उसे ललकारा। गरीबी, आदिवासी शोषण और भूमि विवादों से तंग परिवार के प्रभाव में वह 1996 में पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) में शामिल हो गया। शुरुआत में एक साधारण कैडर के रूप में, उसने बस्तर के घने जंगलों में हथियार चलाना सीखा।
2017 तक, अपने नेतृत्व कौशल और क्रूर रणनीतियों से वह सबसे कम उम्र में सेंट्रल कमेटी सदस्य बना। हिड़मा ने दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी का कमांड संभाला और कम से कम 26 घात लगाकर हमलों का मास्टरमाइंड रहा, जिनमें 155 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। प्रमुख घटनाएं:
2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद।
2013 झीरम घाटी घाटा: कांग्रेस नेताओं पर हमला, 29 मौतें।
2021 तारापुर हमला: 22 सुरक्षाकर्मी शहीद।
पुलिस के अनुसार, हिड़मा ने बस्तर को ‘नक्सलगढ़’ बनाने में अहम भूमिका निभाई। वह हमेशा जंगलों में छिपा रहता, लेकिन हाल के महीनों में सुरक्षाबलों का दबाव बढ़ने से वह छत्तीसगढ़ से भागकर आंध्र प्रदेश की ओर रुख कर रहा था। एक हफ्ते पहले ही छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने हिड़मा की मां पूंजी माडवी से मुलाकात की थी, जिन्होंने बेटे से आत्मसमर्पण की अपील की थी। लेकिन हिड़मा ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
हिड़मा की मौत से माओवादियों की कमर टूट सकती है। वह दंडकारण्य का ‘ऑपरेशनल बैकबोन’ था। अब बस्तर में बचे लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म के जेबों को साफ करना आसान हो जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक सफलता बताते हुए बधाई दी है। सुरक्षाबल अभी शवों की पहचान और हथियार बरामद कर रहे हैं। यह घटना छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के बीच आई है, जहां नक्सलवाद पर चर्चा हो रही है।









