रायपुर। छत्तीसगढ़ से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में मंगलवार सुबह सुरक्षा बलों ने नक्सलियों को करारा झटका दिया है। मारेदुमिल्ली के घने जंगलों में चले ऑपरेशन में देश के सबसे खतरनाक और मोस्ट वांटेड माओवादी नेता माड़वी हिड़मा को उसके अंतिम ठिकाने समेत हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया गया।

मुठभेड़ में हिड़मा की दूसरी पत्नी और दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी की वरिष्ठ महिला कमांडर राजे उर्फ राजक्का सहित कुल 6 माओवादी मारे गए। यह मुठभेड़ सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच हुई। आंध्र प्रदेश पुलिस के एसपी अमित बरदार ने पुष्टि की है कि मारे गए माओवादियों में माड़वी हिड़मा भी शामिल है।

आख़िरकार गिरा बस्तर का सबसे बड़ा ‘दुर्ग’
50 लाख का इनामी और CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे कम उम्र का सदस्य
2010 दंतेवाड़ा नरसंहार, 2013 झीरम घाटी हमला और 2021 सुकमा ताड़मेटला हमले का मास्टरमाइंड
दंडकारण्य में एकमात्र आदिवासी चेहरा जो माओवादी सेंट्रल कमेटी तक पहुंचा
पिछले 15 साल से सुरक्षा बलों की नाक में दम किए हुए था

हफ़्ते भर पहले ही छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा सुकमा के पुवर्ती गांव पहुंचे थे। वहां हिड़मा की बूढ़ी मां पूंजी माड़वी से मिलकर उन्होंने बेटे से सरेंडर की अपील करवाई थी। मां ने वीडियो संदेश में कहा था, “बेटा, अब मेरी उम्र हो गई है। मैं चैन से जीना चाहती हूं। तू घर लौट आ, मैं शांति से मर सकूंगी।” लेकिन हिड़मा ने मां की पुकार को ठुकरा दिया और जंगल की ओर भाग गया, जहाँ आज उसका अंत लिखा गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक हिड़मा की मौत से दंडकारण्य में माओवादियों की कमर टूट जाएगी। वह संगठन का आख़िरी बड़ा ऑपरेशनल कमांडर था। 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य को ये सबसे बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
फिलहाल शवों की आधिकारिक शिनाख़्त और हथियारों की बरामदगी का काम जारी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा बलों को बधाई दी है।










