राजनांदगांव। जिला न्यायालय के फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने मानव तस्करी, नाबालिग के अपहरण, खरीद-फरोख्त, देह व्यापार और सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार बारा की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपियों को उनके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अदालत ने मामले की मुख्य सूत्रधार बताई गई दो महिलाओं साधना उर्फ संध्या वैष्णव और श्रीकुमारी उर्फ मुस्कान गोस्वामी के साथ तीन पुरुष आरोपियों चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर और धनंजय धृतलहरे को दोषी ठहराया।
पांच आरोपियों को कठोर सजा
अदालत के फैसले के बाद पांचों दोषियों को अब अपना शेष प्राकृतिक जीवन जेल में बिताना होगा। मामले में मानव तस्करी से लेकर नाबालिग के अपहरण, खरीद-फरोख्त, देह व्यापार और सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के प्रति किसी तरह की अनावश्यक नरमी नहीं बरती। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांतों का भी हवाला दिया गया।
यौन हिंसा पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कहा कि यौन हिंसा पीड़िता के मन पर ऐसी गहरी चोट छोड़ती है, जिसका प्रभाव जीवनभर बना रह सकता है। ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों के प्रति अनावश्यक सहानुभूति या उदारता दिखाना उचित नहीं है।
कोर्ट की इस टिप्पणी के साथ ही मामले में कठोरतम सजा सुनाई गई, जिससे ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका के सख्त रुख का संदेश गया है।
एक आरोपी को संदेह का लाभ
इस मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इनमें से पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई, जबकि गोपीराम कोल को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ दिया गया। अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया।
फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध, मानव तस्करी और देह व्यापार जैसे गंभीर मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।










