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सावन में कालसर्प दोष की पूजा क्यों? त्र्यंबकेश्वर से है खास कनेक्शन

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप तक, अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं में सावन को राहु-केतु से जुड़े दोषों की शांति के लिए भी विशेष माना गया है. यही वजह है कि इस महीने कालसर्प दोष की पूजा और उससे जुड़े उपायों का महत्व बढ़ जाता है. खास बात यह है कि महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कालसर्प शांति पूजा के लिए प्रसिद्ध तीर्थों में गिना जाता है.

सावन और कालसर्प दोष का क्या संबंध है?
ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष का संबंध राहु और केतु से माना जाता है. जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, तो कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में इसे कालसर्प योग या कालसर्प दोष कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को नागों का स्वामी और देवों के देव महादेव कहा गया है. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहते हैं. इसी कारण नाग और शिव उपासना का संबंध काफी पुराना माना जाता है. सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होने के कारण इस महीने की गई शिव आराधना को राहु-केतु से जुड़ी शांति पूजा के लिए भी शुभ माना जाता है.

सावन में कालसर्प पूजा को क्यों माना जाता है खास?
सावन का हर दिन शिव भक्ति के लिए खास माना जाता है. इस महीने मंदिरों में भक्त सुबह से ही जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. सोमवार के दिन तो शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलती है.मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करने से विशेष पुण्य मिलता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, शिव पूजा, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को शांत करने के उपायों में शामिल किए जाते हैं. इसी आस्था के आधार पर राहु-केतु और कालसर्प दोष से संबंधित पूजा भी इस महीने में कराने की परंपरा है.

त्र्यंबकेश्वर मंदिर से क्यों है कालसर्प दोष का खास कनेक्शन?
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. धार्मिक मान्यताओं में इसे कालसर्प दोष और राहु-केतु से जुड़े अनुष्ठानों के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे खास बात इसका स्वरूप है. यहां गर्भगृह में एक छोटे से गड्ढे के भीतर तीन लिंग स्वरूप दिखाई देते हैं. इन्हें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से इस ज्योतिर्लिंग को त्र्यंबकेश्वर कहा जाता है.मान्यता है कि एक ही स्थान पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की उपस्थिति इस क्षेत्र को विशेष आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है. इसी आस्था के कारण यहां ग्रह दोषों की शांति और विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराने की परंपरा चली आ रही है.

सावन में कालसर्प दोष के लिए कौन से उपाय किए जाते हैं?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सावन के दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है.इसके अलावा नाग देवता की पूजा और नाग पंचमी के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं. इन सभी उपायों के पीछे मूल भावना भगवान शिव की आराधना और राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभावों से मुक्ति की कामना मानी जाती है.

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