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भारत के पड़ोस में बनेगा नया देश? रखाइन में विद्रोहियों ने राजधानी घेरा

भारत के पड़ोसी म्यांमार से रखाइन प्रांत को स्वतंत्र करने की घोषणा कभी भी हो सकती है. दरअसल, अराकान आर्मी ने रखाइन को अलग करने की लड़ाई को तेज कर दिया है. राजधानी सिटवे को अराकान के लड़ाकों ने घेर लिया है और इस लड़ाई को आखिरी बड़ी लड़ाई बताया है. अगर राजधानी सिटवे पर अराकान आर्मी का कब्जा हो जाता है तो विद्रोही समूह रखाइन को अलग देश बनाने की घोषणा कर देंगे.

स्थानीय अखबार द इरावाडी के मुताबिक अराकान आर्मी ने पहले ही 17 में से 14 इलाके पर कब्जा कर लिया है. अब बचे 3 इलाकों पर कब्जे की उसकी तैयारी है. अराकान सेना ने चीन के सिटवे के आसपास डेरा डाल दिया है. उसकी कोशिश सिटवे पर कंट्रोल की है.

पहले समझिए रखाइन राज्य की मांग क्या है?
2009 में अराकान जाति (बौद्ध) ने रखाइन को अधिक प्रशासनिक अधिकार देने की मांग को लेकर आंदोलन किया. इसी साल अराकान आर्मी का गठन किया गया. रखाइन बांग्लादेश और म्यांमार सीमा के पास स्थित एक प्रांत है. यहां पर 2016 के बाद विद्रोह भड़क उठा.

अराकान आर्मी के लोगों ने पहले यहां के रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नरसंहार की शुरुआत की. आबादी के लिहाज से रोहिंग्या यहां पर अल्पसंख्यक थे.

अराकान आर्मी के कारण यहां से रोहिंग्या समुदाय को पलायन करना पड़ गया. इसी बीच म्यांमार की सरकार गिर गई और सेना ने उसे कंट्रोल में ले लिया.

इसके बाद अराकान आर्मी ने यहां पर विद्रोह तेज कर दिया. शुरुआत में एयरस्ट्राइक के कारण अराकान आर्मी जुंटा सेना के सामने हारती नजर आई, लेकिन बाद में उसने इलाके में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. अब अराकान आर्मी की मांग रखाइन को अलग राज्य बनाने की है.

किसी भी सूरत में 2027 तक अलग देश बनाने का लक्ष्य
अराकान सेना के कमांडर-इन-चीफ टुन म्यात नाइंग ने 2027 तक ‘पूरी तरह मुक्त अराकान’ का लक्ष्य घोषित किया है. नाइंग का कहना है कि उनकी सेना सैन्य रूप से इतनी मजबूत हो जाएगी कि म्यांमार की सेना को क्षेत्र छोड़कर भागना पड़ेगा.

स्थानीय अखबार इरावाडी के मुताबिक सिटवे के आसपास अराकान आर्मी ने सैन्य टैंकरों और रसद आपूर्ति को रोकने के लिए बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं. 29 मई से 1 जून के बीच सिटवे के निकट जुंटा सेना और अराकान आर्मी के बीच भीषण झड़प हुई, जिसमें जुंटा के 40 सैनिक मारे गए.

अब तक अराकान आर्मी म्यांमार सेना की एयर स्ट्राइक के सामने अपेक्षाकृत कमजोर पड़ रही थी, लेकिन लड़ाकों ने हाल के महीनों में ड्रोन और कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें हासिल कर ली हैं.

इसके चलते म्यांमार की जुंटा सेना को हवाई हमले करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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