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भिलाई इस्पात संयंत्र में लापरवाही से झुलसे श्रमिक की मौत, प्रबंधन पर मामला दर्ज

भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में गंभीर लापरवाही के चलते आग से झुलसे ठेका श्रमिक रंजीत सिंह की 15 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद हुए जांच में सुरक्षा इंतजामों की कमी और प्रबंधन की उदासीनता उजागर होने पर भिलाई भट्ठी थाना पुलिस ने संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।

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38 वर्षीय रंजीत सिंह, जो कैंप-01 प्रगति नगर का रहने वाला था, मेसर्स मारुति कंस्ट्रक्शन के अधीन SMS-2 कंटिनुअस कास्टिंग शॉप, कास्टर-06 में ठेका श्रमिक के रूप में कार्यरत था। 25 अप्रैल दोपहर करीब 3.15 बजे रंजीत पाइप शिफ्टिंग का काम कर रहा था। इसी दौरान कार्यस्थल पर मौजूद ज्वलनशील पदार्थों में अचानक आग भड़क गई। रंजीत सिंह के साथ तीन अन्य श्रमिक राजू तांडी, रमेश मौर्य और अमित सिंह भी इसकी चपेट में आ गए।

सभी को मेन मेडिकल पोस्ट से सेक्टर-9 अस्पताल भेजा गया, जहां दंडाधिकारी ने उनका मरणासन कथन दर्ज किया। डॉक्टरों के अनुसार, रंजीत 100% जल चुके थे और उन्हें इनहेलेशन इंजरी भी थी। हालत गंभीर होने के चलते 9 मई की रात 10 बजे उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने रात 12.05 बजे पुलिस को सूचना दी।

दुर्ग पुलिस ने दंडाधिकारी के बयान, घायल श्रमिकों के कथन, अस्पताल की रिपोर्ट और घटनास्थल की जांच के बाद पाया कि कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा साधन नहीं थे, श्रमिकों को आवश्यक सेफ्टी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई, सेफ्टी सुपरविजन न के बराबर था, फायर-सेफ्टी उपकरण प्रभावी रूप से मौजूद नहीं थे और ज्वलनशील पदार्थों के बीच जोखिमपूर्ण काम के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।

पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर संयंत्र प्रबंधन की लापरवाही को रंजीत सिंह की मौत का सीधा कारण मानते हुए IPC की धारा 304-A (लापरवाही से मृत्यु) और 285 (ज्वलनशील पदार्थों के प्रति लापरवाही) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगे की विवेचना जारी है।

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