रायपुर छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। सोमवार को प्रदेश के रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद में हुई छापेमारी की कार्रवाई पूरी होने के बाद ED ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर ज़ब्त संपत्तियों का ब्यौरा साझा किया है।
छापेमारी में मिली अकूत संपत्ति
ED के रायपुर ज़ोनल ऑफिस द्वारा 28 अप्रैल को शुरू की गई इस कार्रवाई में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने बताया कि इस सर्च ऑपरेशन के दौरान:
- नगद राशि: ₹66.9 लाख की भारतीय मुद्रा।
- चांदी: 37.13 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंटें और कीमती आभूषण।
- साक्ष्य: भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और ज़मीन से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं।
ऐसे रचा गया भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह
ED की जांच में सामने आया कि यह पूरा घोटाला रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- रिकॉर्ड में हेरफेर: आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी भूमि रिकॉर्ड (खसरा) में जालसाजी की।
- जमीन के टुकड़े करना: राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद, जानबूझकर जमीनों के मालिकाना हक बदले गए और बड़े भूखंडों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया ताकि तकनीकी रूप से ज्यादा मुआवजा वसूला जा सके।
- अवैध भुगतान: संशोधित रिकॉर्ड के आधार पर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाकर वितरित किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
तत्कालीन SDO सहित कई पर FIR
इस मामले की शुरुआत छत्तीसगढ़ की ACB/EOW द्वारा दर्ज की गई FIR से हुई थी। इसमें अभनपुर के तत्कालीन SDO (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है। ED ने इसी FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जांच शुरू की थी।
जांच का दायरा बढ़ेगा
ED के अनुसार, घोटाले के जरिए कमाया गया पैसा ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ की श्रेणी में आता है। एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार की यह रकम किन-किन सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों तक पहुंची है। मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।










