रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत (एट्रोसिटी कोर्ट) ने एक दिल दहला देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पंकज सिन्हा ने मानसिक रूप से बीमार किशोरी की हत्या और धर्मांतरण के मामले में आरोपी महिला ईश्वरी साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
यह मामला न केवल इलाज के नाम पर धोखाधड़ी का है, बल्कि इसमें ‘यीशु के चमत्कार’ का भय दिखाकर धर्मांतरण और क्रूरता की पराकाष्ठा भी सामने आई है।
घटना का घटनाक्रम: इलाज के नाम पर मिला धोखा
पीड़िता सुनीता सोनवानी (निवासी पंडरी, रायपुर) की बेटी मानसिक रूप से बीमार थी। मां ने अपनी बेटी को ठीक करने के लिए रायपुर के निजी अस्पतालों से लेकर महासमुंद मेडिकल कॉलेज तक के चक्कर काटे। इसी दौरान किसी परिचित के माध्यम से उसका संपर्क ईश्वरी साहू (मूल निवासी भाटापारा) से हुआ। सुनीता को भरोसा दिलाया गया था कि ईश्वरी आयुर्वेदिक पद्धति से उसकी बेटी का उपचार कर देगी।
क्रूरता की हदें: ‘चमत्कारी तेल’ और खौलता पानी
अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, ईश्वरी साहू ने आयुर्वेद के नाम पर झांसा देकर पीड़िता को ईसाई धर्म अपनाने और यीशु के चमत्कार पर विश्वास करने को मजबूर किया। उपचार के नाम पर वह किशोरी के शरीर पर कथित ‘चमत्कारी तेल’ और खौलता हुआ गर्म पानी डालती थी। इतना ही नहीं, वह किशोरी को जमीन पर लिटाकर अपने पैरों से उसके सीने और शरीर को कुचलकर मसाज करती थी।
धर्म परिवर्तन का दबाव और मौत का खौफ
जब किशोरी की हालत बिगड़ने लगी, तो ईश्वरी ने सुनीता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। बेटी को ठीक करने के नाम पर सुनीता का धर्म परिवर्तन कराया गया। ईश्वरी ने परिवार को डराया कि यदि इस ‘इलाज’ के बारे में किसी को बताया, तो ‘यीशु’ नाराज हो जाएंगे और अनिष्ट हो जाएगा। अंततः इस प्रताड़ना को किशोरी का शरीर सह नहीं सका और उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ भयावह खुलासा
विशेष लोक अभियोजक उमा शंकर वर्मा ने कोर्ट को बताया कि किशोरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौत की असली वजह और आरोपी की क्रूरता को साबित करने के लिए पर्याप्त थी। रिपोर्ट में पाया गया कि किशोरी की दाहिनी ओर की तीसरी, चौथी और पांचवीं पसली टूटी हुई थी। पैरों से बेरहमी से कुचलने के कारण फेफड़ों में रक्त जमा हो गया था। छाती पर भारी प्रहार (भोथरी वस्तु या पैरों के दबाव) के कारण श्वसन तंत्र रुक गया, जिससे उसकी मृत्यु हुई।
अदालत का फैसला
23 मई 2025 को राजिम थाने में दर्ज शिकायत और पुलिस की केस डायरी के आधार पर मामले की सुनवाई चली। कोर्ट ने इसे ‘हत्यात्मक प्रवृत्ति’ का मामला माना। जज पंकज सिन्हा ने आरोपी महिला ईश्वरी साहू को हत्या और एट्रोसिटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।










