अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान गायत्री मंत्र का उच्चारण अनिवार्य किए जाने के शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने भी आदेश की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया है।
धार्मिक स्वतंत्रता संविधान का मूल आधार: सिंहदेव
टीएस सिंहदेव ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण आधार है। उनका कहना है कि किसी भी धर्म विशेष के मंत्र या प्रार्थना का उच्चारण पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए और इसे किसी व्यक्ति पर अनिवार्य रूप से नहीं थोपा जा सकता।
उन्होंने राज्य सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
‘जबरन लागू करना संविधान की भावना के खिलाफ’
सिंहदेव ने कहा कि यदि सरकार किसी धार्मिक प्रार्थना या मंत्र को अनिवार्य बनाने का प्रयास कर रही है, तो यह संविधान की मूल भावना के विपरीत माना जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जो छात्र या शिक्षक गायत्री मंत्र के पाठ में शामिल नहीं होना चाहते, उन्हें इससे अलग रहने की पूरी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
शिक्षा विभाग के आदेश के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। एक पक्ष इसे भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में प्रदत्त अधिकारों के संदर्भ में उठा रहा है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आदेश को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों की आपत्तियों के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।









