बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों और अधूरी परियोजनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) को जमकर फटकार लगाई है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि वर्षों तक ‘स्टडी’ और ‘टेंडर’ के नाम पर समय बर्बाद किया गया है, जबकि आम जनता सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डाल रही है।
46 करोड़ की मंजूरी, फिर भी काम क्यों रुका?
डिवीजन बेंच ने नेहरू चौक से पेंड्रीडीह (रायपुर रोड) तक सड़क पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 46 करोड़ रुपए की राशि को लेकर तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने हैरानी जताई कि जब अप्रैल में ही इसके लिए स्वीकृति मिल चुकी थी, तो अब तक निर्माण कार्य धरातल पर क्यों शुरू नहीं हुआ? शासन की ‘मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा’ वाली दलील पर कोर्ट ने असंतोष जाहिर किया और इसे गंभीर लापरवाही बताया।
दिखावे की मरम्मत पर कोर्ट का प्रहार
सुनवाई के दौरान अदालत ने दो-टूक कहा कि सड़कों के किनारों की सफाई या डिवाइडर की रंगाई-पुताई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सड़कों का वास्तविक पुनर्निर्माण (Reconstruction) जरूरी है।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा:
“जब खराब सड़कों के कारण लोगों की जान जा रही है, तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? सिर्फ सर्वे और रिपोर्ट के नाम पर वर्षों तक जनता को इंतजार नहीं कराया जा सकता।”
मवेशी और अधूरे ओवरब्रिज पर मांगा शपथ पत्र
हाईकोर्ट ने न केवल सड़कों की हालत, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी शासन को घेरा:
- सड़कों पर मवेशी: सड़कों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े से होने वाली दुर्घटनाओं पर कोर्ट ने जवाब मांगा है।
- अधूरा ओवरब्रिज: कटघोरा के पास लंबे समय से लंबित ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर राज्य शासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया गया है।
लागत घटी पर काम लटका
लोक निर्माण विभाग ने कोर्ट को बताया कि तुर्काडीह, सेंदरी और बेलतरा जैसे क्षेत्रों में पैदल यात्रियों के लिए फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं, जिनकी लागत 17.95 करोड़ से घटकर अब 11.38 करोड़ रह गई है। हालांकि, कोर्ट इस आंकड़ेबाजी से ज्यादा निर्माण की सुस्त रफ्तार पर चिंतित नजर आया।
अब आगे क्या?
शासन ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि सर्वे और सॉयल टेस्ट का काम पूरा हो चुका है और न्यायमित्रों (Amicus Curiae) द्वारा बताई गई सड़कों पर सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब अधिकारियों को अगले सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट के साथ ठोस जवाब देना होगा।









