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छत्तीसगढ़ में 20 हजार गांवों का डेटा ऑनलाइन, जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई तो तुरंत आएगा SMS

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजस्व विभाग की सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बना दिया है। अब राज्य के भू-स्वामियों को अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए पटवारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। तकनीक के इस नए युग में, जमीन के रिकॉर्ड (खसरा या बी-1) में किसी भी प्रकार के बदलाव का प्रयास होते ही मालिक के मोबाइल पर ‘रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट’ पहुंच जाएगा।

धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का होगा खात्मा

राजस्व विभाग के इस नवाचार का सबसे बड़ा लाभ जमीन संबंधी धोखाधड़ी को रोकना है। अक्सर देखा जाता था कि भू-स्वामी की जानकारी के बिना रिकॉर्ड में हेरफेर कर दिया जाता था। लेकिन अब, डिजिटल सुरक्षा कवच के कारण बिना आपकी अनुमति या जानकारी के कोई भी अधिकारी या बिचौलिया रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा।

आंकड़ों में डिजिटल छत्तीसगढ़ का दम

प्रदेश में डिजिटलीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया गया है:

  • 20,286 गांव: खसरा कंप्यूटरीकरण का कार्य पूर्ण।
  • 19,694 गांव: नक्शों का सफलतापूर्वक डिजिटल रूप तैयार।
  • 18,959 गांव: प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत ‘जियोरेफरेंसिंग’ का कार्य संपन्न।
  • 105 उप पंजीयक कार्यालय: अब सीधे तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जुड़ चुके हैं।

प्रमुख सुविधाएं जो बदल देंगी आपकी दुनिया

1. स्वतः नामांतरण (Auto Mutation): अब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और हफ्तों इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर के जरिए स्वतः शुरू हो जाएगी।

2. बैंक लिंकेज और पारदर्शिता: यदि किसी किसान ने कृषि ऋण के लिए अपनी भूमि बैंक में गिरवी रखी है, तो उसकी जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक रहेगी। इससे जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी।

3. घर बैठे डिजिटल दस्तावेज: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि अब नागरिक घर बैठे ही डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा और बी-1 की कॉपी निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए अब सरकारी दफ्तरों की कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं है।

4. मॉडर्न रिकॉर्ड रूम: राज्य की 252 तहसीलों में से 172 में हाई-टेक मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 155 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। यहाँ पुराने से पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित और एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे।

असर्वेक्षित गांवों पर विशेष फोकस

सरकार उन गांवों पर भी ध्यान दे रही है जिनका अब तक सर्वे नहीं हुआ था। राज्य के 1,089 असर्वेक्षित गांवों में से 1,018 के नक्शे तैयार कर लिए गए हैं। इनमें से 233 गांवों का डेटा ‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है।

इस डिजिटल पहल से छत्तीसगढ़ राजस्व प्रशासन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया है। तकनीक के इस हस्तक्षेप से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आम आदमी का समय और पैसा दोनों बचेगा।

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