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संत तिलमिला क्यों गए?’ रामभद्राचार्य पर बरसे भूपेश बघेल, बोले- ‘दिव्य दृष्टि से देखें देश की महंगाई’

जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ में राजनेताओं और संतों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर की गई टिप्पणी के बाद अब प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है। इस विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कूद पड़े हैं। उन्होंने चरणदास महंत के बयान का समर्थन करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तीखे सवाल दागे हैं। वहीं, विवाद बढ़ता देख चरणदास महंत ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी मंशा किसी को ठेस पहुंचाने की नहीं थी।


संत तिलमिला क्यों गए, दिव्य दृष्टि से महंगाई देखें: भूपेश बघेल

बम्हनीडीह पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पूरे विवाद पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य को आड़े हाथों लिया। बघेल ने कहा:

  • “संत को सहज होना चाहिए”: भूपेश बघेल ने कहा कि चरणदास महंत के बयान पर संत को सहज रूप से जवाब देना चाहिए था, लेकिन वे तिलमिला गए।
  • “दिव्य दृष्टि से देखें देश की समस्याएं”: उन्होंने कहा कि हम सांसारिक लोग हैं और मार्गदर्शन के लिए संतों की शरण में जाते हैं। रामभद्राचार्य खुद को राष्ट्रीय संत और पद्मविभूषण कहते हैं, तो वे अपनी दिव्य दृष्टि से यह क्यों नहीं देखते कि आज देश में डीजल-पेट्रोल की किल्लत और महंगाई क्यों बढ़ रही है?
  • पीएम मोदी पर भी साधा निशाना: बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि रामभद्राचार्य अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर बताएं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति से क्यों डरते हैं?

“सभी संत मेरे लिए पूजनीय, अपमान का संस्कार नहीं”: चरणदास महंत

जगद्गुरु रामभद्राचार्य को ‘भाजपा का प्रचारक’ बताने के बाद चर्चा में आए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने अपने बयान को बेहद साधारण बताते हुए कहा:

“मनेंद्रगढ़ में एक सवाल के जवाब में मैंने सिर्फ इतना कहा था कि वे (रामभद्राचार्य) भाजपा के प्रचारक हैं, इसलिए वे उनका प्रवचन सुनने नहीं जाएंगे। साधु-संत मेरे लिए हमेशा पूजनीय हैं। मुझे किसी संत का अपमान करने का संस्कार नहीं मिला है। मैं सभी धर्मों और संप्रदायों के संतों का सम्मान करता हूं।”

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब चरणदास महंत ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान उन्हें भाजपा का प्रचारक कह दिया था। इस पर रामभद्राचार्य ने भी पलटवार किया था। अब इस मामले में भूपेश बघेल की एंट्री और धीरेंद्र शास्त्री का नाम खींचे जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और लंबा खिंचने के आसार हैं।

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