मैनपुर। गरियाबंद जिले के ग्राम जरंडी के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जान जोखिम में डालकर जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव और जंगल धवलपुर के बीच बहने वाली बाकड़ी नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। नदी में कमर तक पानी और तेज बहाव के बावजूद लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नदी पार करनी पड़ती है।
ट्यूब के सहारे स्कूल पहुंच रहे बच्चे
सबसे गंभीर स्थिति स्कूली बच्चों को लेकर है। मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित जरंडी और बोड़ापाला के दर्जनों बच्चे हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए बाकड़ी नदी पार कर धवलपुर पहुंचते हैं। बारिश के चार महीनों में नदी में कमर तक पानी रहता है। ऐसे में बच्चे कई बार तैरकर या ट्यूब के सहारे नदी पार करने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, तेज बहाव के बीच बच्चों को नदी पार कराना बेहद जोखिम भरा है। कई बार अभिभावकों को भी बच्चों के साथ नदी पार करनी पड़ती है। कुछ वर्ष पहले इसी नदी में एक छात्रा के बह जाने से मौत भी हो चुकी है।
राशन और जरूरी सामान के लिए भी नदी पार करना मजबूरी
जरंडी के ग्रामीणों के लिए जंगल धवलपुर रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है। राशन और अन्य आवश्यक सामान लेने के लिए भी उन्हें नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
2023 में मंजूर हुए 6 करोड़, फिर भी पुल अधूरा
ग्रामीणों के अनुसार, बाकड़ी नदी पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए वर्ष 2023 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब 6 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। पुल के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बाद निर्माण की दिशा में आगे कोई ठोस काम नहीं हुआ।
सरपंच दिनेश कुमार नेताम, उपसरपंच बालकिशन ध्रुव और ग्रामीण गजपति ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। अब ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात करने की तैयारी में है।
विधायक ने मांगी मोटरबोट और सुरक्षा व्यवस्था
बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि नदी में फिलहाल कमर से ऊपर पानी बह रहा है और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल मोटरबोट और सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था करने की मांग की है।
विधायक ने स्थायी समाधान के लिए पुल निर्माण की मांग भी उठाई है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
अब सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृति और सर्वे के बावजूद पुल निर्माण कब शुरू होगा और तब तक इन मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?










