छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य की भाजपा सरकार पर जनता की जेब काटने, स्मार्ट मीटर के नाम पर मनमानी वसूली करने और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने सड़क से लेकर विधानसभा तक एक बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
1. तीन चरणों में कांग्रेस का बिजली आंदोलन
कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर के खिलाफ अपने आंदोलन की रणनीति तैयार की है:
- 17 जून: प्रदेश के सभी जिलों में बिजली कार्यालयों का घेराव और मुख्यमंत्री का पुतला दहन।
- 18 जून: जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जनता को जागरूक करना।
- जुलाई का पहला सप्ताह: घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने के समर्थन में जनता से आवेदन भरवाना।
2. आंदोलन के मुख्य मुद्दे और आरोप
- अडानी समूह को फायदा पहुंचाने का आरोप: बैज का दावा है कि स्मार्ट मीटर से लेकर सोलर पावर प्रोजेक्ट्स तक की नीतियां चुनिंदा उद्योगपतियों (विशेषकर अडानी समूह) को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।
- पांचवीं बार बिजली दर में वृद्धि: कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के आने के बाद 5वीं बार बिजली दरें बढ़ी हैं, जिससे अब तक कुल 31.23% की बढ़ोतरी हो चुकी है।
- घरेलू उपभोक्ता: 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी।
- गैर-घरेलू उपभोक्ता: 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी।
- कृषि पंप: 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी।
- तीन गुना तक बढ़े बिल: जून महीने में 45 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के बिल औसत से कई गुना बढ़कर आए हैं। ऑफलाइन-ऑनलाइन अलग बिल भेजने और बिना अनुमति अनुबंध भार (Contract Load) बढ़ाकर पेनल्टी लगाने के आरोप हैं।
- स्मार्ट मीटर पर विवाद: कांग्रेस का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद खपत सामान्य से अधिक दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए छत्तीसगढ़ में भी स्मार्ट मीटर वापस लेने की मांग की है।
- ‘महतारी वंदन’ पर तंज: दीपक बैज ने तंज कसा कि सरकार महतारी वंदन योजना में 1,000 रुपये देती है, लेकिन बिजली बिल के रूप में 4,000 रुपये वसूल लेती है।
3. “बिजली उत्पादक राज्य में इतनी महंगाई क्यों?”
दीपक बैज ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ एक सरप्लस बिजली उत्पादक राज्य है जहाँ कोयले की कोई कमी नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 5 साल में केवल 2 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की थी और ‘400 यूनिट हाफ योजना’ भी लागू की थी, जबकि वर्तमान सरकार जनता पर बोझ डाल रही है।
4. मानसून सत्र में घेराबंदी की तैयारी
13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएगी। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल बिजली, पेट्रोल-डीजल और खाद की बढ़ती कीमतों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुके हैं।
निष्कर्ष: बिजली कटौती, बढ़े हुए बिल और स्मार्ट मीटर का यह मुद्दा आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे गर्म विषय बनने जा रहा है, जिससे भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।









