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रायपुर नकटी कांड: जिस विधायक कॉलोनी का कांग्रेस कर रही विरोध, उसकी नींव खुद उनके राज में रखी गई; 2 साल में ऐसे हुआ ‘अवैध खेल’!

नवा रायपुर के ग्राम नकटी में ‘विधायक कॉलोनी’ के लिए गरीबों के मकान तोड़े जाने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो चुका है। जहां एक तरफ कांग्रेस के विधायक इस कार्रवाई का विरोध करते हुए वहां बनने वाली कॉलोनी में मकान लेने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी दस्तावेजों ने इस पूरी योजना और अतिक्रमण के पीछे के एक बड़े खेल को उजागर कर दिया है।

हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन अभियंता के शासकीय पत्र और राजस्व विभाग के दस्तावेजों से यह साफ हो गया है कि जिस योजना का आज विरोध हो रहा है, उसकी नींव खुद पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। साथ ही, मुआवजे के चक्कर में पिछले दो साल के भीतर यहां अवैध कब्जे का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया गया था।

सरकारी आंकड़ों में बड़ा खुलासा: 2 साल में ऐसे बदला नकटी का भूगोल
हाउसिंग बोर्ड और पटवारी प्रतिवेदन के मुताबिक, नकटी गांव की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का खेल बेहद सुनियोजित तरीके से खेला गया:

वर्ष 2021 की स्थिति: शासकीय रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2021 में इस चरागाह भूमि के केवल 3 हेक्टेयर क्षेत्र में कुछ कच्चे मकान और बाड़ी-खलिहाननुमा अतिक्रमण थे।

वर्ष 2023 की स्थिति: जैसे ही ग्रामीणों और भू-माफियाओं को इस जमीन पर सरकारी परियोजना और मुआवजे की भनक लगी, महज दो साल के भीतर 15 हेक्टेयर भूमि पर पक्के मकानों का अवैध निर्माण कर लिया गया।

अतिक्रमणकारियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर सवाल:
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन मकानों को तोड़ा गया है, उनमें से कई साधारण गरीबों के नहीं बल्कि बड़े रसूखदारों के थे। आंकड़ों के मुताबिक:

10,000 वर्ग फीट से अधिक के क्षेत्रफल वाले 21 आलीशान पक्के मकान तने हुए थे।

5,000 से 10,000 वर्ग फीट के आकार के 13 बड़े मकान बनाए गए थे।

44 ऐसे परिवार पाए गए, जिनके पास उसी नकटी गांव में पहले से ही अपने पक्के मकान मौजूद हैं, यानी उन्होंने सिर्फ अतिरिक्त कब्जे और मुआवजे के लालच में चरागाह की जमीन घेरी थी।

टाइमलाइन: कांग्रेस शासनकाल में ही शुरू हुई थी पूरी प्रक्रिया
इस मामले में राजनीति इसलिए भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि इस पूरी आवासीय योजना की शुरुआत साल 2020 में हुई थी, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।

वर्ष 2020: हाउसिंग बोर्ड ने रायपुर कलेक्टर को नकटी में 15.47 हेक्टेयर भूमि सामान्य आवासीय योजना के लिए आवंटित करने की मांग भेजी।

सितंबर-नवंबर 2020: भू-अभिलेख की प्रक्रिया शुरू हुई और नायब तहसीलदार ने सार्वजनिक इश्तहार जारी कर आपत्तियां आमंत्रित कीं।

अप्रैल 2021: स्वास्थ्य और शिक्षा समेत सभी विभागों को पत्र भेजा गया, लेकिन किसी भी विभाग या स्थानीय स्तर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई।

26 जून 2021: पटवारी ने स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भूमि को गृह निर्माण आवंटन के लिए प्रस्तावित दर्ज किया गया।

दिसंबर 2021 से फरवरी 2022: गृह निर्माण मंडल और एसडीएम के बीच पत्राचार हुआ और आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

कांग्रेस विधायकों का विरोध: मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
इस बीच, बेदखली की कार्रवाई से नाराज कांग्रेस के धमतरी विधायक ओंकार साहू और गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है। दोनों विधायकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर मांग की है कि:

इस प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को नकटी से हटाकर नवा रायपुर की किसी अन्य खाली पड़ी सैकड़ों एकड़ जमीन पर स्थानांतरित किया जाए।

उजाड़े गए ग्रामीण परिवारों को दोबारा उसी स्थान पर बसाया जाए।

विधायकों का तर्क:

“ग्रामीण पिछले 30-40 साल से वहां रह रहे हैं। किसी गरीब का घर उजाड़कर बनाई गई विधायक कॉलोनी में रहना हम उचित नहीं समझते।” प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा विवाद सरकारी जमीन पर कब्जे की टाइमिंग को लेकर है। जब साल 2021 में यह जमीन सरकारी योजना के लिए चिन्हित हो चुकी थी, तो उसके बाद धड़ल्ले से 10-10 हजार वर्ग फीट के आलीशान पक्के मकान कैसे तन गए? साफ है कि सरकारी मुआवजे और जमीन हथियाने की नीयत से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कराया गया था।

अब देखना यह होगा कि कांग्रेस विधायकों के इस विरोध और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज इन कड़वे तथ्यों के बीच साय सरकार इस विधायक कॉलोनी योजना को लेकर क्या अगला कदम उठाती है।

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