केशकाल। नगर पंचायत केशकाल में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच हुए विभिन्न वित्तीय लेन-देन और व्यय को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कथित वित्तीय अनियमितताओं, प्रक्रियागत गड़बड़ियों और अभिलेखों में संदिग्ध लेन-देन की आशंका को लेकर केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने कलेक्टर, जिला कोंडागांव को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
पूर्व विधायक ने जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर विशेष ऑडिट कराने का भी आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र क्रमांक 24/2026, दिनांक 17 अगस्त 2026 में नगर पंचायत के पिछले पांच वित्तीय वर्षों के लेखा-जोखा और भुगतान से जुड़े मूल दस्तावेजों की विस्तृत जांच की मांग रखी है।
खाता-बही में भुगतान दर्ज होना पर्याप्त नहीं
पूर्व विधायक के मुताबिक, नगर पंचायत के वित्तीय अभिलेखों और खाता-बही के अवलोकन से प्रथमदृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत गड़बड़ियों की आशंका दिखाई देती है।
उन्होंने कहा है कि केवल खाता-बही में किसी भुगतान की प्रविष्टि दर्ज होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि भुगतान नियमानुसार और वास्तविक कार्य या सामग्री की आपूर्ति के एवज में किया गया है। इसलिए भुगतान से जुड़े मूल दस्तावेजों का परीक्षण और वास्तविकता का भौतिक सत्यापन जरूरी है।
पांच साल के पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग
पत्र में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के नगर पंचायत के संपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। इसमें प्रमुख रूप से—
खाता-बही और कैशबुक
लेजर और बैंक खाते
भुगतान से जुड़े बिल और वाउचर
भुगतान आदेश
स्वीकृति आदेश
संबंधित वित्तीय दस्तावेज
की जांच शामिल है।
पूर्व विधायक ने इन सभी दस्तावेजों का बैंक रिकॉर्ड और वास्तविक भुगतान से मिलान कराने की मांग की है।
काम के भुगतान की वास्तविकता भी जांचने की मांग
जिन कार्यों के लिए नगर पंचायत की ओर से भुगतान किया गया है, उनकी भी विस्तृत जांच की मांग की गई है।
इसके तहत वर्क ऑर्डर, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, माप पुस्तिका यानी MB, पूर्णता प्रमाण-पत्र और भुगतान अभिलेखों का आपस में मिलान कराने की बात कही गई है।
साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि जिन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया, वे वास्तव में मौके पर हुए हैं या नहीं। इसके लिए स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन कराने का आग्रह किया गया है।
सामग्री खरीदी में भी जांच की मांग
नगर पंचायत द्वारा की गई सामग्री खरीदी के मामलों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
पूर्व विधायक ने कोटेशन और निविदा प्रक्रिया, तुलनात्मक पत्रक, सप्लाई बिल, स्टॉक रजिस्टर और सामग्री प्राप्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने को कहा है।
इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सामग्री की खरीदी निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं और रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री वास्तव में नगर पंचायत को प्राप्त हुई थी या नहीं।
एक ही फर्म या ठेकेदार को बार-बार भुगतान पर नजर
पत्र में एक ही व्यक्ति, फर्म या ठेकेदार को बार-बार किए गए भुगतानों की भी अलग से जांच कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा ऐसे संदिग्ध अथवा असामान्य वित्तीय लेन-देन की पहचान कर उनकी जांच करने की मांग की गई है, जिनमें भुगतान की प्रक्रिया या दस्तावेजों को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा है कि वित्तीय नियमों, निविदा प्रक्रिया और नगरीय निकायों पर लागू शासन के प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
अनियमितता मिली तो जिम्मेदारी तय करने की मांग
पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने कहा है कि यदि जांच के दौरान बिना पर्याप्त दस्तावेज, बिना वास्तविक कार्य, अधिक दर पर, दोहरावपूर्ण अथवा नियम विरुद्ध भुगतान पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने ऐसे मामलों में नियमानुसार राशि की वसूली के साथ अनुशासनात्मक और आवश्यक होने पर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग भी की है।
विशेष ऑडिट का भी आग्रह
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक ने आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक का विशेष लेखा परीक्षण/विशेष ऑडिट किसी सक्षम और स्वतंत्र जांच एजेंसी अथवा लेखा परीक्षण दल से कराने का आग्रह किया है।
साथ ही उन्होंने जांच पूरी होने तक नगर पंचायत के सभी मूल लेखा और भुगतान अभिलेखों को सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि रिकॉर्ड में किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना न रहे।
अब कलेक्टर के फैसले पर नजर
पूर्व विधायक ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच के निष्कर्ष से शिकायतकर्ता को भी अवगत कराने का अनुरोध किया है।
फिलहाल यह मामला जांच की मांग और लगाए गए आरोपों के स्तर पर है। नगर पंचायत की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या जांच के बाद क्या तथ्य निकलकर सामने आते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि स्वतंत्र जांच या विशेष ऑडिट कराया जाता है, तो पिछले पांच वर्षों के वित्तीय लेन-देन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।










