नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर संसद में गतिरोध बना हुआ है. दोनों सदनों की कार्यवाही रोज बाधित हो रही है. आज भी बाधित हुई है. उनके संसद में बयान देने की कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों की मांग को मानते हुए कल किरेन रिजिजू ने बताया कि शाह सदन में विस्तार से जवाब देने को तैयार हैं. हालांकि कल गृह मंत्री का बयान नहीं हो पाया, ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या आज उनका बयान हो पाएगा?
इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “मैंने पहली बार देखा है कि सत्ताधारी पार्टी के सांसद विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. कम से कम हमने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर तो किया. अब उन्हें (अमित शाह को) आकर बयान देना चाहिए.”
लेकिन विपक्ष को पूरा जवाब सुनना पड़ेगाः रिजिजू
इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने कल सोमवार को लोकसभा में कहा था कि सरकार छात्रों के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए राजी है. गृह मंत्री अमित शाह भी विस्तार से जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को उनका पूरा जवाब सुनना पड़ेगा.
रिजिजू ने यह बयान कल दोपहर 2 बजे के बाद तब दिया जब सदन की कार्यवाही बाधित होने के बाद फिर से शुरू हुई. अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा कराने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई पर गृह मंत्री के जवाब की मांग को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया, जिसकी वजह से सदन की बैठक 2 बार स्थगित करनी पड़ी थी.
दोनों सदनों की कार्यवाही आज भी बाधित
हालांकि सरकार की ओर से शाह के बयान दिए जाने की पुष्टि करने के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा. आज मंगलवार की सुबह जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो भी विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया. हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही आज 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. राज्यसभा में भी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी सांसदों के हंगामा के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “कल कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में मैंने सदन चलाने का अनुरोध किया था. आप छात्रों के विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे. अब गृह मंत्री जवाब देने को तैयार है. अब सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर आपसी सहमति बनाएं.”
सदन नहीं चलने से मेरा मन दुखीः ओम बिरला
उन्होंने आगे कहा, “सदन में मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन पहले सदन तो चले. ये जो सब हो रहा है वो संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. आप लोग सदन में तख्तियां लेकर ना आएं. सदन नहीं चलने से मेरा मन दुखी होता है.
इससे पहले स्पीकर बिरला ने कल भी सदन में जारी गतिरोध खत्म करने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा था कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया जाना चाहिए और उन पर सार्थक चर्चा के लिए सभी पक्षों को मिलकर रास्ता निकालने की जरूरत है. सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए आपसी सहमति भी जरूरी है.
तब स्पीकर ने कहा कि विपक्ष की प्रमुख मांग गृह मंत्री के भाषण को लेकर है और सरकार इसके लिए तैयार है. ऐसे में सदस्यों को सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने की जगह चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए और विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखने चाहिए.
संसद का मानसून सत्र अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री के जवाब की मांग को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है. इस वजह से मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई है.









