अम्बिकापुर/ओड़गी। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच सूरजपुर जिले के विकासखंड ओड़गी की दूरस्थ ग्राम पंचायत रसौकी इन दिनों बाढ़ के कारण टापू में तब्दील हो गई है। बरगा नदी में आई बाढ़ से पूरा गांव पानी से घिर गया है और पिछले 6 दिनों से ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह ठप है।
हालात ऐसे हैं कि गांव का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से भी कट गया है। लगातार बारिश और नदी के उफान के कारण ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बरगा नदी में बाढ़ से गांव का संपर्क कटा
रसौकी विकासखंड ओड़गी का अंतिम छोर का गांव है और कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड की सीमा के नजदीक स्थित है। ग्रामीण मुख्य रूप से बिहारपुर-रसौकी मार्ग से आवागमन करते हैं।
भारी बारिश के बाद बरगा नदी का जलस्तर बढ़ने से रास्ता पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले छह दिनों से गांव तक पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में जरूरी सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
उमझर से रसौकी तक सड़क का इंतजार
ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। शासन की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बिहारपुर से ग्राम उमझर तक पक्की सड़क का निर्माण किया गया है, लेकिन उमझर से रसौकी तक सड़क का निर्माण अब तक नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के लिए कई बार स्वीकृति मिलने की बात सामने आई, लेकिन इसके बावजूद रसौकी तक सड़क नहीं बन पाई। बारिश के मौसम में यही समस्या ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है।
वन क्षेत्र में बसा है उमझर
ग्राम पंचायत उमझर वनग्राम है और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के भीतर सामान्य जंगल क्षेत्र में बसा हुआ है। यहां रहने वाले ग्रामीणों को शासन की ओर से पट्टे दिए गए हैं। ग्रामीण लंबे समय से खेती और पशुपालन के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं।
रसौकी को लंबे समय से पहुंचविहीन गांवों में शामिल किया जाता रहा है। ग्रामीण लगातार गांव तक सड़क निर्माण की मांग करते रहे हैं, ताकि बारिश के दिनों में उनका संपर्क पूरी तरह न टूटे।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर
बाढ़ का असर ग्रामीणों की शिक्षा पर भी पड़ा है। रसौकी में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की पढ़ाई की व्यवस्था है, लेकिन हाईस्कूल की शिक्षा के लिए बच्चों को महुली और हायर सेकंडरी व कॉलेज की पढ़ाई के लिए बिहारपुर जाना पड़ता है।
कई बच्चे रोजाना लंबी दूरी तय कर स्कूल और कॉलेज जाते हैं। लेकिन बरगा नदी में बाढ़ आने के बाद रास्ता बंद हो गया है और बच्चों का स्कूल-कॉलेज जाना भी रुक गया है।
इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ ही अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन की नजर
बाढ़ के कारण गांव का संपर्क कटने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में भैयाथान SDM चांदनी कंवर ने बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी BMO से ली जा रही है।
उन्होंने कहा कि मितानिनों के माध्यम से ग्रामीणों को लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सड़क निर्माण नहीं हुआ तो हर साल दोहराएंगे हालात?
रसौकी में मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में सड़क एवं बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उमझर से रसौकी तक सड़क का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक बारिश और बाढ़ के दौरान गांव का संपर्क टूटने की समस्या बनी रहेगी।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की मदद और नदी का जलस्तर कम होने पर है। वहीं, सड़क निर्माण की लंबे समय से चली आ रही मांग के पूरा होने का इंतजार भी जारी है।










