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खूनी हुआ ‘चाइनीज मांझा’: रायपुर में छात्र के चेहरे पर आए 34 टांके, भिलाई में मजदूर का गला रेता

रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ में मकर संक्रांति के आसपास पतंगबाजी का उत्साह अब मातम और दहशत में बदलता जा रहा है। शासन द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे चाइनीज मांझे (प्लास्टिक धागा) ने कई जिंदगियां खतरे में डाल दी हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर रायपुर और भिलाई में तीन बड़ी घटनाएं सामने आई हैं।

केस 1: रायपुर एक्सप्रेस-वे पर छात्र लहूलुहान, लगी 34 टांके

सबसे दर्दनाक हादसा रायपुर के पंडरी एक्सप्रेस-वे पर हुआ। छात्र संकल्प द्विवेदी अपनी बड़ी बहन को स्कूल छोड़ने जा रहा था, तभी हवा में तैरता हुआ चाइनीज मांझा उसके चेहरे पर फंस गया। मांझे की धार इतनी तेज थी कि छात्र के दोनों गाल गहरे कट गए। अस्पताल में उसे 34 टांके लगाने पड़े। डॉक्टरों के मुताबिक घाव इतने गहरे हैं कि निशान मिटाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ सकती है। संकल्प की बहन के हाथ भी मांझे को हटाने की कोशिश में कट गए हैं।

केस 2: भिलाई में मजदूर के गले में फंसा काल

भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के ठेका श्रमिक असलम खान उस वक्त हादसे का शिकार हो गए जब वे साइकिल से घर लौट रहे थे। कोहका निवासी असलम के गले में पतंग का मांझा सीधे आकर उलझ गया। गंभीर रूप से घायल असलम को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

केस 3: मंदिर जा रही महिला घायल

राजधानी के लाखेनगर इलाके में रविवार शाम एक महिला पैदल मंदिर जा रही थी। अचानक उड़ता हुआ मांझा उनके चेहरे पर आ गिरा। बचाव की कोशिश में महिला के होंठ और अंगूठे में गहरे जख्म आए हैं।


प्रशासन से न्याय की गुहार: “जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो”

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घायल छात्र संकल्प द्विवेदी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के पास पहुंचा। नम आंखों से छात्र ने अपील की कि प्रशासन इन ‘खूनी धागों’ की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाए। नेता प्रतिपक्ष ने जिला कलेक्टर और निगम आयुक्त से मांग की है कि केवल जब्ती नहीं, बल्कि भंडारण करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

हालांकि रायपुर नगर निगम और पर्यावरण मंडल की टीमें छापेमारी और जब्ती का दावा कर रही हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।जब मांझा प्रतिबंधित है, तो दुकानों तक इसकी सप्लाई कैसे पहुंच रही है? बाइक सवारों और राहगीरों के लिए यह मांझा ‘अदृश्य तलवार’ की तरह काम कर रहा है।


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